
“जिस कोरबा को पूरे देश की ऊर्जाधानी कहा जाता है… उसी कोरबा के दर्जनों गांव आज अंधेरे में डूबे हैं। हालात ऐसे कि लोगों ने बिजली विभाग के सब स्टेशन पर कब्जा जैसा आंदोलन छेड़ दिया। महिलाओं ने साफ कह दिया… ‘हमारे गांव में बिजली नहीं, तो किसी गांव में भी नहीं।’ आखिर क्यों फूटा ग्रामीणों का गुस्सा… देखिए यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।”
कोरबा जिले के बरपाली सब स्टेशन से जुड़े सलिहाभांठा, बंधवाभांठा, डोंगरीभांठा, पकरिया, सराईडीह, सरगबुंदिया, पहंदा और नवापारा समेत करीब दर्जनों गांव पिछले कई दिनों से बिजली संकट झेल रहे हैं। बरसात की उमस, अंधेरा और सांप-बिच्छुओं के डर ने ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया है।
बीती शाम सैकड़ों महिला और पुरुष बरपाली विद्युत सब स्टेशन पहुंच गए। शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक ग्रामीण धरने पर बैठे रहे। उनका साफ कहना था…
“जब तक हमारे गांव में बिजली नहीं आएगी, तब तक दूसरे फीडरों में भी बिजली नहीं चलने देंगे।”
ग्रामीणों ने अन्य फीडरों की बिजली भी बंद करा दी और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धरने में शामिल महिलाओं ने बिजली विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि एक सप्ताह से गांव अंधेरे में डूबा है। पीने का पानी नहीं, मोबाइल चार्ज नहीं, बच्चों की पढ़ाई ठप और रातभर सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग के कुछ कर्मचारी शराब के नशे में ड्यूटी करते हैं, जबकि सब स्टेशन में पदस्थ जेई अक्सर ड्यूटी पर ही नहीं आते।
ग्रामीणों का गुस्सा सिर्फ बिजली विभाग तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने क्षेत्र के नेताओं पर भी जमकर निशाना साधा।
ग्रामीणों का कहना है कि यह वही इलाका है जहां पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर और पूर्व सांसद स्वर्गीय डॉ. बंशीलाल महतो का गृह क्षेत्र है, लेकिन इसके बावजूद लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
उनका आरोप है कि चुनाव के समय वादे करने वाले नेता अब जनता की समस्याओं से मुंह मोड़ चुके हैं।
करीब तीन घंटे तक चले धरने के बाद विभाग के डीई ने मंगलवार तक बिजली बहाल करने और खराब ट्रांसफार्मर बदलने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया।
लेकिन साथ ही चेतावनी भी दे दी…
अगर मंगलवार तक बिजली बहाल नहीं हुई, तो बरपाली में चक्का जाम होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग और प्रशासन की होगी।
“ऊर्जाधानी कोरबा के गांव अंधेरे में हैं… अधिकारी आश्वासन दे रहे हैं… नेता खामोश हैं… और जनता सड़क पर उतरने को मजबूर है। अब देखना होगा कि मंगलवार तक बिजली बहाल होती है या फिर बरपाली की सड़कों पर चक्का जाम और बड़ा जनआंदोलन देखने को मिलेगा।





