
नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून को लेकर अपना पहला दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें इस वर्ष देश में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। विभाग के अनुसार जून से सितंबर के बीच कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 92 प्रतिशत रह सकती है, यानी करीब 5 प्रतिशत की कमी देखने को मिल सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने के संकेत हैं, जो भारतीय मानसून को कमजोर कर सकती है। इसके प्रभाव से मध्य और पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति बन सकती है, जिसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है। वहीं पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है, जबकि दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो सकती है।
हालांकि राहत की बात यह है कि हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) का पॉजिटिव फेज बनने की संभावना है, जो मानसून के दूसरे हिस्से में अल नीनो के प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है।
कम बारिश के अनुमान का सीधा असर खेती पर पड़ सकता है, खासकर धान, दाल और सब्जियों की फसलों पर। ऐसे में किसानों को संभावित जल संकट को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी करने की सलाह दी गई





