जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में मानसून से पहले जंगलों और जल संरक्षण को लेकर बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया है। वन विभाग ‘वर्षा जल जहां गिरे, वहीं सहेजें’ मिशन के तहत पहाड़ी और पथरीले इलाकों में सीड बॉल तकनीक का उपयोग कर हरियाली बढ़ाने की तैयारी में जुटा है। साथ ही लाखों जल संरक्षण संरचनाएं बनाकर बारिश की हर बूंद को जमीन में सहेजने का लक्ष्य रखा गया है।
लाखों संरचनाओं से बदलेगा जल स्तर
बस्तर वनमंडल ने इस वर्ष जल संवर्धन के लिए बड़े और तकनीकी लक्ष्य तय किए हैं। इसके तहत करीब 1.8 लाख एससीटी (खाइयां) पहाड़ी ढलानों पर बनाई जा रही हैं, जो बहते पानी की गति को रोककर उसे जमीन में समाहित करेंगी। वहीं 1.3 लाख लूज बोल्डर चेकडैम (एलबीसीडी) के जरिए नालों में पत्थरों के छोटे बांध बनाकर मिट्टी के कटाव को रोका जा रहा है और नमी को बनाए रखा जा रहा है।
सीड बॉल से पथरीले पहाड़ों में हरियाली
बस्तर की दुर्गम और अत्यधिक ढलान वाली पहाड़ियों पर, जहां पारंपरिक वृक्षारोपण संभव नहीं है, वहां सीड बॉल तकनीक अपनाई जा रही है। मिट्टी और खाद से बने इन बीज बॉल्स को मानसून की पहली बारिश के साथ पहाड़ी इलाकों में डाला जाएगा, जो प्राकृतिक रूप से अंकुरित होकर हरित आवरण को बढ़ाएंगे।
सूखी लकड़ियों से संरक्षण का अनोखा तरीका
वन विभाग जंगलों में गिरी सूखी लकड़ियों का उपयोग भी जल और मृदा संरक्षण के लिए कर रहा है। ब्रश वुड चेकडैम और कंटूर वुडन बंड के जरिए नालों और ढलानों पर पानी के बहाव को नियंत्रित कर मिट्टी के कटाव को रोका जा रहा है।
वनाग्नि पर भी लगेगा ब्रेक
इन संरचनाओं में सूखी लकड़ियों और बायोमास के उपयोग से जंगलों का फ्यूल लोड कम होगा, जिससे गर्मियों में लगने वाली वनाग्नि की तीव्रता में कमी आएगी और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
अधिकारियों ने बताया भविष्य का प्लान
वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार तिवारी ने बताया कि बस्तर की भौगोलिक स्थिति जल संरक्षण के लिए बेहद अनुकूल है और लक्ष्य है कि वर्षा की हर बूंद को सहेजकर वनों को आत्मनिर्भर बनाया जाए।
वहीं वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने कहा कि सीड बॉल तकनीक और जल संरचनाएं आने वाले समय में बस्तर के लिए संजीवनी साबित होंगी। इससे वन्यजीवों को भी सालभर पानी उपलब्ध हो सकेगा।
वन विभाग ने इस अभियान में आम नागरिकों और वन प्रबंधन समितियों से भी सहयोग की अपील की है, ताकि बस्तर को हरियाली और जल संरक्षण के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।




