रायपुर । जो कभी तालाबों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध था — आज अपनी पहचान खोने की कगार पर है। शहर के ऐतिहासिक जलाशय, जो हमारी संस्कृति, आस्था और पर्यावरणीय धरोहर के प्रतीक हैं, अब लापरवाही और गंदगी के शिकार हो रहे हैं।
ऐसा ही एक महत्वपूर्ण जलाशय महाराजबंध तालाब, जो रायपुर के मध्य में स्थित है, आज अत्यंत दयनीय स्थिति में पहुँच चुका है। यह तालाब कलचुरी राजा ब्रह्मदेव के काल में निर्मित हुआ था और धार्मिक रूप से अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि भगवान श्रीराम वनवास के दौरान रायपुर प्रवास में दूधधारी मठ में रुके थे और यह क्षेत्र उनके चरणों से पवित्र हुआ था।
सदियों से यह स्थान संतों, साधुओं और श्रद्धालुओं का केंद्र रहा है, किंतु आज इसकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। तालाब में गंदगी और कचरे का अंबार लगा है, जलकुंभी और खरपतवार ने पूरे क्षेत्र को ढँक लिया है, और वर्षों से कोई गहरीकरण कार्य नहीं हुआ। घरों और नालियों का गंदा पानी सीधे तालाब में गिर रहा है, जबकि एस.टी.पी. प्लांट निष्क्रिय पड़ा हुआ है।




