फर्जी जाति प्रमाणपत्र से नोटरी बने वकील की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने किया रद्द

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बिलासपुर। फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर की गई नोटरी की नियुक्ति को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अवैध मानते हुए रद्द कर दिया है। जस्टिस संजय एस. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने साफ किया कि जाति प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार केवल एसडीओ (राजस्व), डिप्टी कलेक्टर या उपायुक्त स्तर के अधिकारी को है, अतिरिक्त तहसीलदार द्वारा जारी प्रमाणपत्र मान्य नहीं होगा।

दरअसल साल 2009 में राज्य सरकार ने सीपत क्षेत्र के अधिवक्ता रामाधार बुनकर को नोटरी नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की थी। उन्होंने अपने आवेदन में खुद को ओबीसी वर्ग की महरा जाति का बताते हुए अतिरिक्त तहसीलदार सीपत द्वारा जारी प्रमाणपत्र पेश किया था। इस आधार पर उन्हें 5 साल के लिए नोटरी नियुक्त किया गया।

इस बीच बिलासपुर के 27 खोली निवासी अधिवक्ता अमिताभ तिवारी ने विधि विभाग से शिकायत की कि बुनकर ने फर्जी दस्तावेज लगाकर नियुक्ति हासिल की है। जांच में यह आरोप सही पाया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि बुनकर को ओबीसी जाति का प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि केवल निवास प्रमाणपत्र मिला था। कलेक्टर और एसडीएम की रिपोर्ट में भी यही तथ्य दर्ज किए गए।

इसी आधार पर राज्य सरकार ने अक्टूबर 2021 में उनकी नियुक्ति पर रोक लगाते हुए आदेश जारी किया। इस आदेश को बुनकर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, वहीं अमिताभ तिवारी ने भी अलग से याचिका लगाई थी। दोनों पर एक साथ सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने बुनकर की नियुक्ति को अवैध ठहराकर निरस्त कर दिया।