
*डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह कोरबा पूर्व* के राखड़ बांध को लेकर 3 गांव के ग्रामीण सड़क पर उतर आए हैं। *गोढ़ी, बेन्द्रकोना और पडरीपानी* के प्रभावित परिवारों ने शुक्रवार को *पंडरीपानी स्थित सीएसईबी राखड़ डैम को बंद करा दिया* और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए।
*15 साल से लटका है वादा*
2007 में राखड़ बांध निर्माण के लिए जिन किसानों की जमीन गई थी, उनसे 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि *अर्जित भूमि के एवज में 308 प्रभावित कुटुंबों के एक-एक सदस्य को अर्हता अनुसार CSPGCL में नियमित पद पर नियुक्ति* दी जाएगी। संचालक मंडल ने भी इसे मंजूरी दी थी।
लेकिन 15 साल बाद भी *308 में से आधे से अधिक परिवारों को ही नौकरी मिल पाई* है। शेष परिवारों का आरोप है कि उन्हें नियमित नौकरी की जगह सिर्फ *3 साल की संविदा* दी जा रही है। शर्त यह भी है कि हर साल अनुबंध नवीनीकृत होगा और 3 साल बाद कंपनी में नियमित करने की कोई बाध्यता नहीं होगी।
*राखड़ डैम बंद कर शुरू किया आंदोलन*
आक्रोशित ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 7 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी थी। चेतावनी के बाद शुक्रवार को *गोढ़ी, बेन्द्रकोना, पडरीपानी के ग्रामीण राखड़ डैम पहुंचे और उसे बंद करा दिया*। इसके बाद वहीं धरने पर बैठ गए।
बताया जा रहा है कि लगभग *46 परिवार प्रभावित* हैं। कुछ ग्रामीण संविदा पर काम कर रहे हैं, लेकिन बाकी ने नियमित नौकरी न मिलने के कारण काम करने से इंकार कर दिया है।
*ग्रामीणों का आरोप*
प्रभावितों का कहना है कि 2007 में अधिग्रहित हुई उनकी *पैतृक भूमि ही आय का एकमात्र स्रोत* थी। जमीन जाने के बाद जीवन-यापन मुश्किल हो गया। 2010 की घोषणा का उल्लंघन कर सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है।
साथ ही ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग द्वारा *बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत समस्याएं* भी दूर नहीं की जा रही हैं।
*ग्रामीणों की मांग*
1. पूर्व में नौकरी पा चुके प्रभावितों की तर्ज पर शेष सभी को *नियमित पद पर नियुक्ति* दी जाए।
2. 3 साल की संविदा व्यवस्था को तत्काल खत्म किया जाए।
3. प्रभावित गांवों की *मूलभूत सुविधाएं* तत्काल बहाल की जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि 15 साल से वे सिर्फ आश्वासन झेल रहे हैं। अब आर-पार की लड़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
उल्लेखनीय है कि यह राखड़ बांध *CSPGCL की ताप विद्युत परियोजना* का हिस्सा है। भूमि अधिग्रहण के समय पुनर्वास और रोजगार का वादा किया गया था। अब प्रभावित परिवार उसी वादे को पूरा कराने सड़क पर उतरे हैं।






