
–बिलासपुर जिले के रतनपुर से पेंड्रा तक 510 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा नेशनल हाईवे-45 पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गया है। निर्माणाधीन सड़क पर कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, कई हिस्सों में सड़क धंस गई है और किनारे टूटने लगे हैं। सड़क अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई है, लेकिन सामने आई तस्वीरों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि मजबूत बेस तैयार करने के बजाय मिट्टी के ऊपर ही डामर की परत बिछा दी गई, जिसके कारण बारिश होते ही मिट्टी बैठ गई और सड़क जगह-जगह फटने लगी। लोगों का कहना है कि जब पहली ही बारिश में सड़क की यह स्थिति है, तो भविष्य में इसकी मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
गौरतलब है कि 17 जून को लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश बंसल ने निर्माण कार्य का निरीक्षण कर गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद लोक निर्माण मंत्री एवं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी सड़क निर्माण का जायजा लिया था। इसके बावजूद पहली ही बारिश में सामने आई स्थिति ने विभाग के गुणवत्ता संबंधी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सड़क बिलासपुर, रतनपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को अमरकंटक तथा जबलपुर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए ताकि निर्माण में यदि किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके। वहीं, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता आर.के. खांबरा ने विभाग की ओर से अपना पक्ष रखते हुए गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य किए जाने की बात कही है।




