पत्थलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम दीवानपुर में करैत सांप के डंसने से चार वर्षीय कार्तिक मांझी की मौत हो गई, परिजन बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक के भरोसे रहे।
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में अंधविश्वास एक बार फिर मासूम की जिंदगी पर भारी पड़ गया। पत्थलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम दीवानपुर में करैत सांप के डंसने से चार वर्षीय कार्तिक मांझी की मौत हो गई। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि परिजन बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक के भरोसे रहे। इलाज में हुई करीब तीन घंटे की देरी ने बच्चे की जान ले ली।डेमोग्राफ़िक्स
अस्पताल की जगह झाड़-फूंक पर भरोसा
जानकारी के अनुसार, गुरुवार 9 जुलाई शाम कार्तिक अपने भाई के साथ घर में जमीन पर सो रहा था। इसी दौरान करैत सांप ने उसे डंस लिया। परिजनों ने प्राथमिक उपचार या अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने का फैसला किया। इस दौरान बच्चे की तबीयत लगातार बिगड़ती रही। जब उसे पत्थलगांव सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पत्थलगांव
डॉक्टर बोले- समय पर इलाज जरूरी
सिविल अस्पताल के बीएमओ डॉ. जेम्स मिज ने बताया कि बच्चे को काफी देर बाद अस्पताल लाया गया। तब तक सांप का जहर पूरे शरीर में फैल चुका था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध है और सर्पदंश के हर मामले में बिना देरी किए मरीज को अस्पताल लाना चाहिए।
पुलिस की लोगों से अपील
एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल ने लोगों से बरसात के मौसम में सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जमीन पर सोने से बचें और यदि किसी को सांप काट ले तो अंधविश्वास या झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचें।
यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।





