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कोरिया जिले का स्थापना दिवस : 28 बरस बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित, विभाजन के बाद बदल गया भूगोल

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कोरिया जिले के गठन को 28 साल पूरे, विभाजन से बदला भूगोल, विकास में उतार-चढ़ाव जारी, शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर पर्यटन और अधोसंरचना तक कई चुनौतियाँ कायम।

 

 

 

 

। छत्तीसगढ़ राज्य गठन से पहले अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान 25 मई 1998 को सरगुजा जिले से अलग होकर कोरिया जिला अस्तित्व में आया। तब जिले के गठन की खुशी में लोगों ने होली और दिवाली साथ मनाई थी। कोयला क्षेत्रों, समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और जनआंदोलनों की गूंज के साथ कोरिया जिला आज 28 वर्ष पूरे कर चुका है। लेकिन इस सफर में जहाँ विकास की कई उपलब्धियाँ मिलीं, वहीं विभाजन ने जिले के इतिहास और भूगोल दोनों को बदल दिया।

 

विभाजन ने बदल दी जिले की शक्ल

 

कोरिया जिले के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव इसका विभाजन रहा, जब नया एमसीबी जिला बना। इस दौरान खड़गवां जनपद को कोरिया में शामिल करने की मांग को लेकर स्थानीय प्रतिनिधियों ने लंबे समय तक अनिश्चितकालीन धरना दिया, लेकिन मांग पूरी नहीं हुई। विभाजन के बाद कोरिया भौगोलिक रूप से छोटा पड़ा, जबकि विकास की जिम्मेदारियाँ वैसी ही रहीं। आज भी प्रशासन के सामने जिले को विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ाने की चुनौती कायम है।

 

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कार्यालय

लंबे सफर में क्या खोया-क्या पाया

28 सालों में कोरिया जिला कई उतार-चढ़ाव से गुजरा। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कुछ प्रगति जरूर हुई, जिला अस्पताल में सुविधाएँ बढ़ीं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी आज भी दर्द का कारण है। कई मरीजों को अब भी बड़े शहरों के लिए रेफ़र करना पड़ता है। जल जीवन मिशन के तहत गांवों तक पानी पहुंचाने का काम पूरा नहीं हो सका और कई गांव आज भी शुद्ध पेयजल से वंचित हैं।

 

पर्यटन से नई पहचान की उम्मीद

कोरिया सिर्फ कोयला क्षेत्र के कारण नहीं, बल्कि प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थलों की वजह से भी विशिष्ट है। गुरुघासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिज़र्व ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। जिले में कई प्रागैतिहासिक, पुरातात्विक और रामायणकालीन स्थल मौजूद हैं परंतु इन्हें विकसित कर बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में बदलने की पहल अभी भी अधूरी है।

 

 

 

विधि कॉलेज की मांग आज भी अधूरी

बैकुंठपुर में लंबे समय से विधि संकाय खोलने की मांग उठती रही, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कानून की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को अंबिकापुर या बिलासपुर जाना पड़ता है, जिससे विशेष रूप से बालिकाओं के लिए समस्याएँ खड़ी होती हैं। इसी कारण जिला न्यायालय में महिला अधिवक्ताओं की संख्या आज भी बेहद कम है।

 

हवाई पट्टी की घोषणा अब भी फाइलों में

कोरिया जिले में अब तक एक भी हवाई पट्टी नहीं बन सकी। पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा इसकी घोषणा की गई और जमीन का चिन्हांकन भी हुआ, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते काम आगे नहीं बढ़ा। स्थिति यह है कि हवाई पट्टी की घोषणा सिर्फ घोषणा बनकर रह गई है