शहनाई का स्वर चीख में बदला
इंदौर, जहां खुशियों की शहनाइयां बजनी थीं, वहां चीखों और खून की गूंज सुनाई दी। एक सगाई समारोह, जो जश्न का मौका था, देखते ही देखते मौत का मैदान बन गया। सिर्फ एक मामूली विवाद, और कुछ सिरफिरे युवकों का बेकाबू गुस्सा, इतना खतरनाक हो गया कि 18 साल के शुभम को अपनी जान गंवानी पड़ी।
सोचिए, वो लड़का लड़ाई करने नहीं, लड़ाई रोकने गया था, लेकिन इन हैवानों को इंसानियत से क्या मतलब? पीछे से घेरकर हमला, गालियां, मारपीट, और फिर सीने में पेचकस घोंप दिया! ये हत्या नहीं, ये खुलेआम गुंडागर्दी है!
खून से लथपथ शुभम जमीन पर गिरा, और वहीं खत्म हो गई उसकी जिंदगी। अस्पताल पहुंचा, लेकिन सिस्टम और समाज दोनों उसे बचा नहीं पाए।
सवाल ये है, क्या अब बीच-बचाव करना भी गुनाह हो गया है? क्या सड़कों पर कानून नहीं, सिर्फ गुंडों का राज चलेगा? पुलिस ने कुछ संदिग्धों को पकड़ा है, लेकिन क्या इतना काफी है? जब तक ऐसे दरिंदों में कानून का डर नहीं होगा, तब तक हर खुशी का माहौल, मातम में बदलता रहेगा!
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