Home Astrology कोल लेवी मनी लांड्रिंग घोटाले की अब सीबीआई करेंगी जांच, सभी आईजी–...

कोल लेवी मनी लांड्रिंग घोटाले की अब सीबीआई करेंगी जांच, सभी आईजी– एसपी को समस्त दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश

0
86

कोल लेवी मनी लांड्रिंग घोटाले की अब सीबीआई करेंगी जांच, सभी आईजी– एसपी को समस्त दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देशIMG 20250714 WA00891
रायपुर। दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम (DSPE Act) की धारा-6 के तहत छत्तीसगढ़ में हुए 570 करोड़ के कोल लेवी मनी लांड्रिंग घोटाले की सीबीआई जांच को विधिवत स्वीकृति दे दी गई है।
अब तक इस मामले की जांच करने वाली एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन के नाम पर 570 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई। हर टन कोयले पर 25 रुपये की दर से यह वसूली की जाती थी।

सूर्यकान्त तिवारी घोटाले का मास्टरमाइंड
इस घोटाले का मास्टरमाइंड रायपुर के व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी को माना जा रहा है। ईडी के अनुसार, सूर्यकांत तिवारी ने अफसरों, ट्रांसपोर्टरों और दलालों की मदद से यह पूरा तंत्र खड़ा किया था। सूर्यकांत तिवारी इस वक्त न्यायिक हिरासत में है और उसकी जमानत याचिकाएं कई बार खारिज हो चुकी हैं। काल ही उसके भाई नवनीत तिवारी को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में सहयोग के निर्देश
गृह विभाग की फाइल (क्रमांक F No. 4-10/Home-C/) और पुलिस मुख्यालय के सीआईडी लीगल सेक्शन ने सभी रेंज आईजी और जिलों के एसपी को विशेष निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि CBI को जांच में सहयोग करें और सभी दस्तावेजों की तुरंत आपूर्ति करें।

ED ने की थी CBI जांच की मांग
गौरतलब है कि इस मामले में पहले ही कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। 14 अगस्त 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी। ईडी ने याचिका में आरोप लगाया था कि उन्होंने पीएमएलए की धारा 66 के तहत राज्य सरकार को घोटाले से जुड़े दस्तावेज सौंपे थे, मगर कार्रवाई नहीं हुई।
ईडी ने यह भी कहा था कि राज्य के आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और ACB/EOW में अधिकांश अधिकारी राज्य सरकार के अधीन हैं, जिससे निष्पक्ष जांच पर सवाल खड़े होते हैं। इस घोटाले में गिरफ्तार तीन वरिष्ठ अधिकारियों को मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत दी थी। इनमें आईएएस समीर विश्नोई, आईएएस रानू साहू और तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ये अफसर छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे और अपनी उपस्थिति अन्य राज्यों के पुलिस थानों में दर्ज कराएं।