Acn18. Com कोरबा.एसईसीएल (SECL) मानिकपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम दादर खुर्द के भू-विस्थापितों एवं ग्रामीणों ने अपने अधिकारों के हनन और रोजगार में हो रहे पक्षपात को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में मुख्य महाप्रबंधक (CGM) एसईसीएल मानिकपुर क्षेत्र तथा जिला कलेक्टर/जिला दंडाधिकारी, कोरबा को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और एसईसीएल प्रबंधन के कुछ अधिकारियों द्वारा उनके अधिकारों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। विशेष रूप से स्थानीय पार्षद (वार्ड नंबर 10) उपेन्द्र पटेल द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए गए उस बयान का कड़ा विरोध किया गया है, जिसमें उन्होंने दादर खुर्द के निवासियों को “भू-विस्थापित नहीं है” कहा था।
ग्रामीणों ने इस बयान को पूरी तरह से असत्य, निराधार और अपने वर्षों के संघर्ष का अपमान बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वजों और ग्रामीणों की जमीनें एसईसीएल खदान विस्तार तथा औद्योगिक कार्यों के लिए अधिग्रहित की गई हैं, जिसके स्पष्ट राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) आज भी मौजूद हैं। किसी भी बाहरी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि को ग्रामीणों के विस्थापन की श्रेणी को खारिज करने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है।
स्थानीय युवाओं के रोजगार में बाधा का आरोप
ग्रामीणों ने मानिकपुर खदान के अंतर्गत संचालित निजी ठेका कंपनियों, कोल ट्रांसपोर्टिंग और अन्य कार्यों में स्थानीय प्रभावित युवाओं को मिलने वाले रोजगार में बार-बार रोड़े अटकाने का भी गंभीर आरोप लगाया है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि:
स्थानीय युवाओं की जायज मांगों को दबाकर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
इससे भू-विस्थापित परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
प्रबंधन की चुप्पी और भ्रामक दावों का खंडन न करना, साथ ही विस्थापितों के हक में रोजगार नीति को कड़ाई से लागू न करना प्रबंधन की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भू-विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा की जाए, भ्रामक बयानों पर रोक लगाई जाए और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए।









