सारंगढ़-बिलाईगढ़ में ‘नारी रक्षा सम्मान निधि’ योजना के नाम पर रकम दोगुनी करने का झांसा देकर सैकड़ों महिलाओं से करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है।
छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में स्व-सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं ने रकम दोगुनी करने का लालच देकर करोड़ों रुपये की कथित ठगी किए जाने का आरोप लगाया है। बड़ी संख्या में महिलाएं सिटी कोतवाली सारंगढ़ पहुंचीं और ग्वालिनडीह निवासी दिनेश बंजारे के खिलाफ शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
‘नारी रक्षा सम्मान निधि’ योजना का दिया गया झांसा
पीड़ित महिलाओं के अनुसार, दिनेश बंजारे ने खुद को एक एनजीओ संचालक बताते हुए “नारी रक्षा सम्मान निधि” नामक योजना की जानकारी दी। उसने दावा किया कि योजना में निवेश करने पर कुछ समय बाद राशि दोगुनी होकर वापस मिलेगी। इस भरोसे में आकर कई महिलाओं ने अपनी जमा पूंजी और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से लिए गए ऋण की राशि भी उसके पास जमा कर दी।
गांव-गांव जाकर महिलाओं को जोड़ा
महिलाओं का आरोप है कि आरोपी गांव-गांव जाकर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को योजना से जोड़ता था। वह माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से ऋण दिलवाकर उसी राशि का निवेश कराने के लिए प्रेरित करता था। साथ ही ऋण की किस्त खुद जमा करने और हर महीने अतिरिक्त लाभ देने का भी भरोसा देता था।
शुरुआत में भुगतान, फिर बंद हुई रकम
शिकायत के मुताबिक, शुरुआती दौर में कुछ महिलाओं को तय राशि का भुगतान किया गया, जिससे लोगों का विश्वास बढ़ गया। बाद में भुगतान पूरी तरह बंद हो गया। इसके बाद सैकड़ों महिलाएं अपनी जमा पूंजी वापस पाने के लिए पुलिस की शरण में पहुंचीं।
आरोपी पहले से जेल में बंद
पुलिस के अनुसार, जिस दिनेश बंजारे पर ठगी के आरोप लगे हैं, वह पहले से ही एक म्यूल अकाउंट से जुड़े साइबर ठगी के मामले में न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद है। जांच में उसके बैंक खाते में करीब 2 करोड़ 71 लाख रुपये के लेन-देन का पता चला था। इस मामले में देश के विभिन्न राज्यों से 50 से अधिक शिकायतें दर्ज होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।
करोड़ों की ठगी की आशंका, जांच जारी
महिलाओं की नई शिकायतों के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, सैकड़ों महिलाओं से बड़ी राशि एकत्र की गई है और कथित ठगी का आंकड़ा करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक राशि और प्रभावित लोगों की संख्या स्पष्ट हो सकेगी




