
कोरबा।कोयला खदानों की तस्वीर अब बदलने जा रही है। यहां अब सिर्फ पुरुष ही नहीं, महिलाएं भी डंपर, शॉवेल जैसी भारी-भरकम मशीनों का संचालन करती नजर आएंगी। एसईसीएल ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पहली बार महिला कर्मचारियों को हेवी अर्थ मूविंग मशीन ऑपरेटर बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण शुरू किया है।
एसईसीएल के सीएमडी हरिश दुहन की पहल पर यह कार्यक्रम शुरू किया गया है। कंपनी के विभिन्न क्षेत्रों से 19 महिला कर्मचारियों का चयन कर 6 से 18 जुलाई तक गेवरा परियोजना के ओबी फेस में 12 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में महिलाओं को डंपर, शॉवेल और अन्य हेवी मशीनों के सुरक्षित एवं तकनीकी संचालन की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।
अनुभवी ऑपरेटर उन्हें मशीन चलाने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों, तकनीकी दक्षता और खदान में काम के व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत करा रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन्हें खदानों में नियमित रूप से मशीन संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इससे पहली बार एसईसीएल की खदानों में महिला ऑपरेटर भारी मशीनों की कमान संभालती दिखेंगी।
प्रशिक्षण ले रही महिलाओं ने बताया कि जब पहली बार ओबी फेस पहुंचीं तो विशाल मशीनों और खदान का माहौल देखकर घबरा गई थीं। मशीनों की तेज आवाज और सुरक्षा की जिम्मेदारी से डर लग रहा था। कई के मन में सवाल था कि क्या वे पुरुष ऑपरेटरों की तरह मशीन चला पाएंगी।
लेकिन अनुभवी ऑपरेटरों ने तकनीकी बारीकियां सरल तरीके से समझाईं। धीरे-धीरे डर खत्म हुआ और अब वे पूरे आत्मविश्वास से मशीनें सीख रही हैं। महिलाओं का कहना है कि यह उनके लिए सिर्फ नई जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अपनी क्षमता साबित करने का मौका है।
गेवरा क्षेत्र की HR मैनेजर लकिता प्रशिक्षण स्थल पहुंचीं। उन्होंने कहा कि एसईसीएल में यह अपनी तरह की पहली पहल है। इसका उद्देश्य महिलाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम का अवसर देना है। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए अनुशासन और समर्पण के साथ प्रशिक्षण पूरा करने को कहा।
खनन क्षेत्र में अब तक भारी मशीनों का संचालन पुरुषों का काम माना जाता था। एसईसीएल की यह पहल न सिर्फ 19 महिलाओं के करियर में बदलाव लाएगी, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा देगी। आने वाले समय में जब ये महिलाएं डंपर और शॉवेल चलाती दिखेंगी, तो यह खनन उद्योग की बदलती कार्यसंस्कृति की नई पहचान बनेगी।





