
रक्षा बंधन के त्योहार को लेकर बाजारों में तैयारियां तेज हो गई हैं। बाजार जहां रंग-बिरंगी राखियों से सजने लगे हैं, वहीं कोरिया जिले की स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं इस बार कुछ अलग करने की तैयारी में हैं। समूह की दीदियां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर धान से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों के जरिए त्योहार की खुशियों के साथ महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है रक्षा बंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। त्योहार से पहले बाजारों में तरह-तरह की राखियों की रौनक देखने को मिल रही है। बड़े शहरों से आने वाली राखियों के बीच अब स्थानीय स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही राखियां भी लोगों को आकर्षित कर रही है बैकुंठपुर विकासखंड की स्व-सहायता समूह से जुड़ी दीदियां इस बार धान से तैयार राखियां बना रही हैं। इन राखियों को आकर्षक रूप देने के लिए महिलाएं काफी मेहनत कर रही हैं। स्थानीय सामग्री के इस्तेमाल से तैयार हो रही ये राखियां पारंपरिक राखियों से अलग नजर आएंगी। समूह की महिलाओं का कहना है कि राखी निर्माण से उन्हें घर बैठे रोजगार का अवसर मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में उनके द्वारा तैयार राखियों की मांग भी बढ़ी है। यही वजह है कि इस बार बिक्री का लक्ष्य भी पहले से अधिक रखा गया है।
राखी निर्माण का संचालन कर रहीं कल्पना देवांगन ने बताया कि पिछले वर्ष समूह की दीदियों ने करीब 30 हजार रुपये की राखियों का विक्रय किया था। इस वर्ष करीब 40 हजार रुपये की बिक्री का लक्ष्य रखा गया है।
बाजार में मिलने वाली राखियों के बीच स्व-सहायता समूह की दीदियों द्वारा तैयार की जा रही ये राखियां इसलिए खास हैं, क्योंकि इनमें स्थानीय सामग्री और महिलाओं की मेहनत दोनों दिखाई दे रही हैं। इन राखियों की खरीदारी कर लोग न सिर्फ भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार को खास बना सकते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं के हुनर और उनके आत्मनिर्भर बनने की कोशिश को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।





