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कवर्धावासियों को मिली राहत : CM साय से मुलाकात के बाद किसानों का आंदोलन खत्म, खुले सभी रास्ते

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कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धावासियों को 48 घंटे बाद बड़ी राहत मिली है। गन्ने के उचित मूल्य सहित विभिन्न मांगों को लेकर जारी किसानों का आंदोलन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात के बाद समाप्त हो गया। किसानों के आंदोलन खत्म करने की घोषणा के बाद शहर के सभी बंद रास्ते खोल दिए गए हैं और रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 पर भी आवागमन बहाल हो गया है।

CM साय के फैसले के बाद खत्म हुआ किसान आंदोलन
कवर्धा में गन्ने का उचित मूल्य और शक्कर कारखानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर किसान पिछले 48 घंटे से आंदोलन कर रहे थे। प्रदर्शन के चलते शहर के कई प्रमुख रास्तों पर आवागमन प्रभावित हो गया था। रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 पर भी यातायात बाधित था। इस बीच भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से चर्चा की। बातचीत के बाद मुख्यमंत्री ने गन्ने की खरीदी 425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने का निर्णय लिया। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी।

425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से होगी गन्ने की खरीदी
किसानों की प्रमुख मांग गन्ने का उचित मूल्य निर्धारित करना था। मुख्यमंत्री के निर्णय के अनुसार, गन्ने की खरीदी अब 425 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। इसके अलावा, पेराई सत्र 2025-26 के दौरान पहले खरीदे गए गन्ने का भुगतान भी बढ़ी हुई दर से करने का फैसला लिया गया है। इस निर्णय से गन्ना उत्पादक किसानों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 पर आवागमन बहाल
किसानों के आंदोलन समाप्त करने की घोषणा के बाद कवर्धा शहर में यातायात व्यवस्था सामान्य होने लगी है। प्रदर्शन के दौरान बंद किए गए रास्तों से बैरिकेड हटा दिए गए हैं। शहर के सभी प्रमुख मार्ग खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 पर भी वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। आंदोलन के कारण परेशान हो रहे वाहन चालकों और यात्रियों को अब राहत मिली है।

किसान संघ के जिलाध्यक्ष ने की आंदोलन खत्म करने की घोषणा
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष डोमन चंद्रवंशी ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के फैसले के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया। गन्ने की खरीदी दर और पिछले पेराई सत्र के भुगतान को लेकर लिए गए निर्णय के बाद अब किसानों की आगे की रणनीति और शक्कर कारखानों में खरीदी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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