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महंत पर जगतगुरु का पलटवार : रामभद्राचार्य ने दी खुली चुनौती, बोले- 22 भाषाएं जानता हूं, चाहें तो परंपरा का पूरा परीक्षण कर लें

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चिरमिरी में चरणदास महंत के विवादित बयान पर जगतगुरु रामभद्राचार्य ने रामकथा मंच से तीखा पलटवार किया, साथ ही खुली चुनौती के साथ आरोपों की बारिश की।

 

 

 

 

। चिरमिरी में चल रही श्रीराम कथा के नौवें दिन राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत द्वारा दिए गए बयान पर जगतगुरु रामभद्राचार्य ने व्यासपीठ से खुला पलटवार करते हुए चुनौती पेश की।

 

महंत के बयान से शुरू हुआ विवाद

 

मनेन्द्रगढ़ पहुंचे चरणदास महंत ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि वे रामभद्राचार्य को जगतगुरु नहीं मानते और इस कारण उनकी कथा में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि रामभद्राचार्य भाजपा का प्रचार कर रहे हैं, इसलिए वे किसी धर्मगुरु की बजाय ‘भाजपा के प्रचारक’ हैं। महंत ने इस दौरान यह भी कहा कि ऐसे बाबा लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं और कांग्रेस के नेताओं को ऐसी जगह नहीं जाना चाहिए। उन्होंने धीरेन्द्र शास्त्री सहित कई संतों को भी फर्जी बताया।

रामभद्राचार्य का मंच से कड़ा जवाब

श्रीराम कथा के दौरान लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम की व्यासपीठ से रामभद्राचार्य ने महंत के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महंत चाहे तो जगतगुरु की परंपरा का पूरा परीक्षण कर लें। रामभद्राचार्य ने कहा कि जगतगुरु का दर्जा पाने के लिए तीन ग्रंथों पर भाष्य लिखना अनिवार्य होता है और सभी अखाड़े इस नियम को मान्यता देते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे सभी कसौटियों पर खरे उतरते हैं और यही बात कुछ लोगों को चुभ रही है। उन्होंने कहा कि रामभक्तों से प्रेम करने वालों को उनका आशीर्वाद सदैव मिलेगा, लेकिन जिन्हें यह स्वीकार नहीं है वे अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहे हैं।

 

 

राजनीतिक कटाक्ष और पुराने विवादों का उल्लेख

रामभद्राचार्य ने अपने जवाब में महंत और कांग्रेस शासनकाल पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक समय निहत्थे रामभक्तों पर लाठियाँ और गोलियाँ तक चलवाई गई थीं, जबकि वे स्वयं रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान महीनों जेल में रहे। उन्होंने कहा कि देश को कमजोर करने, विभाजन और सामाजिक विघटन के कई निर्णय कांग्रेस शासन में हुए। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि अजीत जोगी कुछ बेहतर थे, लेकिन बाद के नेताओं ने यह भी नहीं सीखा कि संतों और धार्मिक परंपराओं के बारे में किस भाषा का प्रयोग किया जाता है।

 

22 भाषाओं का दावा और खुली चुनौती

रामभद्राचार्य ने कहा कि वे 22 भाषाओं में धारा प्रवाह बोल सकते हैं और किसी भी स्तर की परीक्षा के लिए तैयार हैं। उन्होंने महंत को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें संदेह है तो वे खुले मंच पर आकर उनकी विद्वता और योग्यता की जांच कर लें। जैसे ही उन्होंने यह चुनौती दी, पूरे कथा स्थल में जय श्री राम के नारे गूंज उठे और भक्तों ने उत्साह के साथ उनका समर्थन किया।