Home Astrology आस्था का ऐसा अद्भुत चमत्कार: जहां जंगल को देवी मानकर लोग पेड़ों...

आस्था का ऐसा अद्भुत चमत्कार: जहां जंगल को देवी मानकर लोग पेड़ों को काटना तो दूर, गिरी हुई लकड़ी तक घर नहीं ले जाते, मां अन्नधरी देवी की महिमा से आज भी सुरक्षित है पूरी हरियाली

0
18

 

 

 

 

भरत सिंह चौहान की रिपोर्ट

 

 

 

 

Screenshot 20260324 112452 Gallery 1

– छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सुदूर वनांचल ग्राम पहरिया में आस्था और प्रकृति का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जहां लोग जंगल को देवी का स्वरूप मानते हैं, यहां स्थित मां अन्नधरी देवी मंदिर के कारण पूरे क्षेत्र की हरियाली आज भी सुरक्षित है, जांजगीर-चांपा जिले के एक ऐसे गांव पहरिया जहां आस्था ने प्रकृति को बचाकर रखा है. इस गांव में मां अन्नधरी देवी का प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसके चारों ओर घना जंगल फैला हुआ है, खास बात यह है कि यहां के ग्रामीण इस जंगल को बेहद पवित्र मानते हैं, लोग पेड़ों को काटना तो दूर, उनकी टहनियों तक को नहीं तोड़ते है, अगर कोई पेड़ अपने आप गिर भी जाए, तो वह वहीं पड़ा-पड़ा सूख जाता है, लेकिन कोई उसे अपने घर नहीं ले जाता है.

 

मंदिर के बैगा बेदराम बताते हैं कि मां अन्नधरी देवी की यह प्रतिमा सैकड़ों साल पुरानी है, मान्यता है कि माता की कृपा से गांव में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती, इसी कारण उनका नाम अन्नधरी देवी पड़ा, नवरात्रि के समय यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और दूर-दूर से श्रद्धालु व्रत रखकर, नंगे पैर और लोट लगाकर माता के दर्शन करने आते हैं,

 

इस जंगल को लेकर लोगों में गहरी आस्था के साथ एक डर भी जुड़ा हुआ है, ग्रामीणों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति यहां की लकड़ी को अपने घर ले जाता है या उसका उपयोग करता है, तो उसके साथ अनहोनी हो सकती है, कई लोगों ने ऐसा करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें परेशानी और कष्टों का सामना करना पड़ा है. कुछ मामलों में तो लोगों को बिच्छू के डंक जैसी घटनाएं भी झेलनी पड़ीं, और माता से माफी मांगने के बाद ही राहत मिली. यही वजह है कि यहां की लकड़ी का उपयोग केवल धार्मिक कार्यों जैसे होली दहन, नवधा रामायण, भागवत कथा या हवन में ही किया जाता है, वह भी विधिवत माता रानी से अनुमति मांगकर.

 

मंदिर समिति अध्यक्ष कार्तिकराम साहू बताते हैं कि पहरिया पहाड़ को गांव का रक्षक माना जाता है। जब भी गांव में किसी महामारी या संकट का खतरा होता है, तो लोग देवी की शरण में जाते हैं और उन्हें विश्वास है कि माता उनकी रक्षा करती हैं। यहां तक कि गांव में यह भी मान्यता है कि माता की कृपा से किसी भी परिवार को संतान सुख से वंचित नहीं रहना पड़ता।

 

वहीं समिति उपाध्यक्ष अश्वनी कुमार सिंह का कहना है कि यह स्थान भाई-बहन के स्वरूप वाले मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जो अपने आप में अनोखा है। यहां आने वाले श्रद्धालु सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं और माता से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद पाते हैं।

इस पूरे क्षेत्र की सबसे खास बात यह है कि घने जंगलों से घिरे होने के बावजूद केवल पहरिया का यह जंगल पूरी तरह सुरक्षित है, और इसका कारण है लोगों की अटूट आस्था।

तो यह थी एक ऐसी कहानी, जहां आस्था ने न सिर्फ संस्कृति को जिंदा रखा है, बल्कि प्रकृति को भी सुरक्षित रखा है।