
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच आज एक बड़ी और निर्णायक खबर सामने आ रही है। नक्सल संगठन के शीर्ष लीडर पापाराव अपने 12 साथियों के साथ आज आत्मसमर्पण करने जा रहा है। यह घटनाक्रम नक्सल मोर्चे पर सरकार की अब तक की सबसे बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा कि “आज नक्सल संगठन पर अंतिम प्रहार होगा।”
सरकार ने पहले ही 31 मार्च तक नक्सलवाद को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में यह सरेंडर उस दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
आत्मसमर्पण के बाद सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी सरेंडर करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पापा राव के बारे में मुख्य तथ्य
पापा राव (असली नाम सुन्नम चंद्रैया), बस्तर, छत्तीसगढ़ में सक्रिय एक कुख्यात टॉप नक्सली कमांडर रहा है, जो मुख्य रूप से वेस्ट बस्तर एरिया कमेटी के कमांडर के रूप में जाना जाता है। उसे दंडकारिणी स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का एक प्रमुख सदस्य माना जाता था।
पापा राव पर ₹50 लाख से अधिक का इनाम था और वह बीजापुर क्षेत्र में दशकों से सक्रिय था।
प्रमुख हमले: 6 जनवरी 2025 को कुटू बेदरे रोड पर हुए आईटी ब्लास्ट, जिसमें 8 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे, में पापा राव की भूमिका थी। उसे 2010 में 76 जवानों की शहादत वाले हमले की योजना में भी जिम्मेदार माना जाता है।
पत्नी का एनकाउंटर: नवंबर 2025 में बीजापुर जिले में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में उसकी पत्नी उर्मिला, जो गोरिल्ला आर्मी बटालियन की सदस्य थी, मारी गई थी।
जनवरी 2026 में बीजापुर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में पापा राव के मारे जाने की खबरें आईं, लेकिन पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। 2026 की खबरों के अनुसार, उसे “बस्तर का आखिरी बड़ा नक्सल कमांडर” माना जा रहा था, और उस पर आत्मसमर्पण का दबाव था।
पापा राव को छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उड़ीसा में भी वांटेड सूची में रखा गया था।




