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बजट पेश होने से पहले PM मोदी का संबोधन: ‘राष्ट्रपति का अभिभाषण देश की आवाज, भारत-EU समझौते से खुलेंगे नए अवसर’

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बजट पेश होने से पहले PM मोदी का संबोधन: ‘राष्ट्रपति का अभिभाषण देश की आवाज, भारत-EU समझौते से खुलेंगे नए अवसर’

दिल्ली। संसद के बजट सत्र के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन परिसर में मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने बजट सत्र को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सत्र देश की दिशा और प्राथमिकताओं को तय करने वाला है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि सभी सांसद राष्ट्रपति के अभिभाषण को गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ लेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देशवासियों की आवाज है। इसमें सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का स्पष्ट रोडमैप होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में कई अहम मुद्दों को उठाया है, जिन पर संसद में सकारात्मक और सार्थक चर्चा होनी चाहिए।

‘आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ भारत’

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत की मौजूदा आर्थिक और वैश्विक स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ देश है, जो न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी मजबूत भूमिका निभा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “आज का भारत आत्मविश्वास के साथ फैसले ले रहा है और दुनिया भारत की क्षमताओं को गंभीरता से देख रही है।”

भारत-EU समझौते को बताया ‘मदर ऑफ ऑल डील’

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और के बीच हुए अहम समझौते का जिक्र करते हुए इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत के लिए 27 देशों का एक विशाल बाजार खुल गया है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है।

पीएम ने स्पष्ट किया कि इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ देश के युवाओं को मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, निर्यात बढ़ेगा और भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

‘उत्तम गुणवत्ता से जीतेंगे 27 देशों का दिल’

प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत और युवाओं से आह्वान किया कि वे उत्तम गुणवत्ता (Quality) पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि अगर भारत गुणवत्ता के मानकों पर खरा उतरा, तो यूरोप के 27 देशों के उपभोक्ताओं का दिल जीतना कोई मुश्किल काम नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि बजट सत्र के दौरान होने वाली चर्चाएं और फैसले देश के आर्थिक भविष्य, निवेश, रोजगार और विकास की दिशा तय करेंगे। ऐसे में सभी सांसदों की यह जिम्मेदारी है कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए सत्र को सार्थक बनाएं