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बदले की नीयत से दर्ज झूठा पॉक्सो केस ध्वस्त, युवा अधिवक्ता विशाल यादव की पैरवी से आरोपी दोषमुक्त

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*”बदले की नीयत से दर्ज झूठा पॉक्सो केस ध्वस्त, युवा अधिवक्ता विशाल यादव की पैरवी से आरोपी दोषमुक्त”*

कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि निर्दोष व्यक्ति को न्याय दिलाना भी है। हाल ही में थाना सिविल लाइंस, कोरबा में दर्ज एक प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, 296 एवं 115(2) तथा पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धारा 8 एवं 12 के अंतर्गत लगाए गए गंभीर आरोपों से माननीय न्यायालय ने आरोपी को सम्मानपूर्वक दोषमुक्त करार दिया।

मामले की पृष्ठभूमि में यह तथ्य सामने आया कि शिकायतकर्ता महिला और आरोपी आपस में रिश्तेदार थे तथा एक-दूसरे के घर के बगल में रहते थे। दोनों पक्षों के बीच पूर्व से आपसी विवाद चला आ रहा था। घटना से पूर्व महिला एवं उसकी पुत्री द्वारा आरोपी एवं उसकी पत्नी के साथ मारपीट की गई थी, जिसमें आरोपी के पैर पर चाकू से हमला किया गया, जिसकी शिकायत आरोपी द्वारा सिविल लाइंस थाना, कोरबा में दर्ज कराई गई थी।

जब महिला को अपने विरुद्ध दर्ज उक्त एफआईआर की जानकारी मिली, तब उसने प्रतिशोध एवं बदला लेने की नीयत से अपनी नाबालिग पुत्री को आधार बनाते हुए आरोपी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई। न्यायालय में सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि एफआईआर में देरी थी, पुलिस जांच में गंभीर कमियाँ थीं तथा अभियोजन पक्ष के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए। स्वतंत्र एवं विश्वसनीय साक्ष्यों का भी अभाव रहा।

इस अत्यंत संवेदनशील प्रकरण में बचाव पक्ष की ओर से युवा विद्वान अधिवक्ता विशाल यादव ने अत्यंत सूझबूझ, तर्कशक्ति और कानून की गहरी समझ के साथ प्रभावी पैरवी की। उनके द्वारा प्रस्तुत तथ्यों एवं विधिक तर्कों के आधार पर अभियोजन की कहानी संदेह के घेरे में आ गई।

माननीय न्यायालय ने समस्त साक्ष्यों का सूक्ष्म परीक्षण करते हुए यह स्पष्ट किया कि जब तक आरोप संदेह से परे सिद्ध न हों, तब तक किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। परिणामस्वरूप, आरोपी को सभी आरोपों से दोषमुक्त किया गया।

यह निर्णय न केवल एक निर्दोष व्यक्ति के लिए न्याय की जीत है, बल्कि समाज के लिए भी यह संदेश देता है कि बदले की भावना से लगाए गए झूठे आरोप न्याय की कसौटी पर टिक नहीं पाते।
*अधिवक्ता विशाल यादव* के लिए यह फैसला उनकी विधिक दक्षता, ईमानदारी और न्याय के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।