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वायनाड लैंडस्लाइड, 4 दिन बाद बचाए गए 4 आदिवासी बच्चे:रेस्क्यू टीम ने हथेली में भरकर पानी पिलाया, शरीर से बांधकर पहाड़ से उतारा

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वायनाड लैंडस्लाइड के चौथे दिन शुक्रवार को एक अच्छी खबर आई। वन अधिकारियों ने 8 घंटे के ऑपरेशन में एक दूरदराज आदिवासी इलाके से 4 बच्चों समेत 6 लोगों का रेस्क्यू किया। बच्चे एक से चार साल के हैं। पनिया समुदाय का यह आदिवासी परिवार पहाड़ी की चोटी पर एक गुफा में फंसा था।

न्यूज एजेंसी PTI से बातचीत में कलपेट्‌टा रेंज के फॉरेस्ट ऑफिसर हशीस ने बताया- हमने गुरुवार को मां और 4 साल के बच्चे को जंगल के पास भटकते देखा।

पूछताछ में उसने अपना नाम शांता बताया। उसने कहा कि वे लोग चूरलमाला के एराट्टुकुंडु ऊरु (बस्ती) में रहते हैं। उसके 3 और बच्चे, उनके पिता भूखे-प्यासे पहाड़ी पर एक गुफा में फंसे हैं।

बच्चों को बांधने के लिए टीम ने चादर के टुकड़ों का इस्तेमाल किया।
बच्चों को बांधने के लिए टीम ने चादर के टुकड़ों का इस्तेमाल किया।

फिसलन के बीच 8 घंटे का रेस्क्यू
हशीस ने बताया- हमने 4 लोगों की रेस्क्यू टीम बनाई। भारी बारिश के बीच फिसलन भरी और खड़ी चट्टानों से होकर टीम ने 8 घंटे की कोशिश के बाद इन्हें निकाला। फिसलन भरी चट्टानों पर चढ़ने के लिए पेड़ों से रस्सियां बांधनी पड़ीं।

जब हम गुफा के पास पहुंचे तो तीन बच्चे और एक शख्स वहां बैठे हुए थे। हमने उन्हें अपने पास बुलाया। वे सामने नहीं आ रहे थे। काफी समझाने के बाद उनके पिता हमारे साथ आने के लिए राजी हो गए। हमने बच्चों को अपने शरीर से बांध लिया और वापस अपनी यात्रा शुरू कर दी।

टीम ने बच्चों को पहले अपने सीने से कपड़े के सहारे बांधा, बाद में इन्हें लेकर रस्सियों के सहारे फॉरेस्ट ऑफिस तक आई।
टीम ने बच्चों को पहले अपने सीने से कपड़े के सहारे बांधा, बाद में इन्हें लेकर रस्सियों के सहारे फॉरेस्ट ऑफिस तक आई।

बाहरी लोगों से बातचीत करने से बचते हैं
हशीस ने बताया- पनिया समुदाय के ये लोग बाहरी लोगों से बातचीत करने से बचते हैं। वे आम तौर पर वन उत्पादों पर आश्रित रहते हैं और उन्हें स्थानीय बाजार में बेचकर चावल खरीदते हैं। हालांकि, ऐसा लगता है कि लैंडस्लाइड और भारी बारिश के कारण वे कई दिनों से भूखे थे।

जब वे हमारे पास आए तो हमने देखा कि बच्चे बहुत थके हुए थे। हम अपने साथ खाने-पीने का जो भी सामान ले गए थे पहले उन्हें खिलाया। पानी पिलाया और पीठ पर बांधकर पहाड़ के नीचे लाए।