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नही बचाई जा सकी नवजात की जान,7 दिन पहले पालना में छोड़ गया था कोई शिशु को,पुलिस ने कहा- वारिश की कर रहे खोज

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acn18.com कोरबा /सर्दी के मौसम में 10 डिग्री के तापमान के बीच आधी रात को अज्ञात व्यक्ति के द्वारा छोड़े गए नवजात शिशु की जिंदगी आखिरकार समाप्त हो गई। अनैतिक रिश्ते की इस पहचान से खुद को होने वाली परेशानी का ख्याल कर निर्मोही मा ने शिशु को तिरस्कृत कर दिया। अनाथ बच्चों का संरक्षण करने वाली संस्था मातृछाया ने अज्ञात नवजात को बचाने की भरपूर कोशिश की लेकिन उसे निराशा हाथ लगी। कोरबा पुलिस ने मामला दर्ज करने के साथ दावा किया है कि नवजात के वास्तविक वारिसों की खोज की जाएगी।

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अपनी खुशियों के लिए नैतिक और अनैतिक के बीच के बुनियादी अंतर को नहीं समझने वाले गंभीर किस्म की गलतियां करते हैं तो उनके नतीजे उसे भोगने पड़ जाते है, जिन्हें नाम मिलता है नवजात का। लेकिन असली चुनौती बनी होती है अपने अस्तित्व को बचाने और अपने माता-पिता का पता लगाने की। आधुनिक समाज की विकृति को दर्शाने वाले मौजूदा दौर के लिव इन रिलेशनशिप की कड़वी सच्चाई कहना होगा कि लंबे समय तक आपसी संपर्क और गलत दिशा में बढ़ने के कारण दुष्प्रभाव की गारंटी भी तय हो जाती है। ऐसे में नाजायज रिश्ते से होने वाली संतान को लेकर समस्या खड़ी हो जाती है कि उसका क्या करे? लेकिन इसमें संतान का आखिर दोष कैसा।

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कोरबा के कुआभट्टा स्थित मातृछाया के पालनाघर में 7 दिन पहले रात्रि में कोई अज्ञात व्यक्ति भरी ठंड में दूसरों से नजर बचाकर नवजात को छोड़ गया, जिसे किसी मां ने ही इस संसार मे आने के लिए जन्म दिया। और हैरानी की बात ये रही कि शिशु के वर्तमान और भविष्य से बेपरवाह होकर वह मां कितनी जल्द निर्मोही भी हो गई। कड़कड़ाती सर्द रातों में खुद को बचाने जब लोग क्या कुछ तिकड़म नही करते, तब वह मां ममता और दया के भाव से कैसे विरत हो गई कि उसका कलेजे का टुकड़ा पालना में कैसे सांसे लेगा। अनाथ बच्चों के संरक्षण के लिए काम कर रही मातृछाया को जब पालना में नवजात शिशु मिला तो तत्काल उसका उपचार शुरू कराया गया। पूरी कोशिश यह रही कि ईश्वर की इस अनमोल रचना को सवारा जाए, बचाया जाए। सभी कोशिशों के बावजूद विधाता के आगे किसी की एक नही चली। आखिरकार गुमनामी के साथ आया शिशु 7 दिन की यात्रा के बाद चल बसा। उसे जन्म देने वाले और इस तरह लावारिश फेंकने वाले कौन थे, पुलिस इसकी जांच कर रही है।

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सामान्य तौर पर भ्रूण हत्या और नवजात शिशु को कहि भी फेंककर अपनी बला टालने के मामले कुल मिलाकर अवैध संबंधों की परिणति हुआ करते है। लोकलाज के डर और समाज से बहिष्कृत होने के खतरे उन लोगो की आंखों में तैरते रहते है, जो खतरनाक जोखिम उठाने से कतई परहेज नहीं करते। इन्ही सब कारणों से सरकार ने जन्म पूर्व लैंगिक परीक्षण को अवैध और आपराधिक घोषित किया है। पीएनडीटी एक्ट की परिधि में इस तरह के मामलों को रखा गया है। प्रशासन की समिति खास तौर पर सोनोग्राफी और गाइनेकोलॉजिस्ट केंद्र में लगातार निगरानी भी कर रही है। सब कुछ होने पर भी अनैतिक संबंधों के कारण होने वाली घटनाएं लगातार सामने आ रही है। अहम सवाल कायम है कि अपने सुख की खातिर नवजात की जान से खेलने वाले अज्ञात जन्मदाताओं पर आखिर कब कठोरता से नकेल कसी जाएगी।

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