Acn18Com.कोरबा में गणेश प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर उठी आपत्ति के बाद अब मूर्तिकारों ने बड़ा फैसला लिया है। हिंदू नारायणी सेना की आपत्ति के बाद जिले के मूर्तिकारों की आपात बैठक हुई, जिसमें प्रतिमाओं में पाई गई खामियों को स्वीकार करते हुए तत्काल सुधार का निर्णय लिया गया। दावा है कि कोरबा शहर में 100 से ज्यादा बड़ी गणेश प्रतिमाओं में आवश्यक सुधार कराया गया है।
कोरबा में गणेश उत्सव से पहले भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर विवाद गहरा गया था।
माटी मूर्तिकार विकास समिति के अध्यक्ष बिसाहू राम कुंभकार के नेतृत्व में जिले के मूर्तिकारों की आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में हिंदू नारायणी सेना के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल समेत संगठन के पदाधिकारी और पंडित-महाराज भी शामिल हुए।
हिंदू नारायणी सेना का आरोप है कि कुछ प्रतिमाओं में भगवान श्री गणेश के पारंपरिक स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही थी। कार्टून, बाल, एआई और डांसिंग स्वरूप के साथ-साथ पीओपी से प्रतिमा निर्माण को लेकर भी संगठन ने आपत्ति जताई।
बैठक के दौरान गणेश प्रतिमाओं के आसन, सिर, पेट और अन्य स्वरूपगत त्रुटियों पर चर्चा हुई। संगठन की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद मूर्तिकारों ने अपनी गलती स्वीकार की और प्रतिमाओं में तत्काल सुधार करने पर सहमति जताई।
इसके बाद हिंदू नारायणी सेना और मूर्तिकारों की टीम ने शहर में अलग-अलग स्थानों पर बन रही गणेश प्रतिमाओं का निरीक्षण किया। संगठन के पंडितों ने जिन प्रतिमाओं में विसंगतियां बताईं, उनमें आवश्यक सुधार कराया गया।
दावा किया गया है कि 100 से अधिक बड़ी गणेश प्रतिमाओं में तत्काल सुधार किया गया है। साथ ही भविष्य में भगवान के स्वरूप के साथ ऐसी गलती दोबारा नहीं होने देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
हिंदू नारायणी सेना ने पूजा समितियों से अपील की है कि आधुनिकता या कुछ नया करने के नाम पर भगवान श्री गणेश के पारंपरिक स्वरूप से छेड़छाड़ न कराई जाए और धार्मिक ग्रंथों, वेदों एवं शास्त्रों के अनुरूप प्रतिमाओं का निर्माण और पूजन कराया जाए।
फिलहाल गणेश उत्सव से पहले कोरबा में प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर यह मामला चर्चा में है। मूर्तिकारों के सुधार के दावे के बाद अब देखना होगा कि आगामी दिनों में गणेश प्रतिमाओं को लेकर प्रशासन और पूजा समितियों की क्या भूमिका रहती है।









