Home KORBA कटघोरा क्षेत्र में सड़क दुर्घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल

कटघोरा क्षेत्र में सड़क दुर्घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल

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कटघोरा क्षेत्र के जेबीडी कॉलेज, जयपुर के पास बीती रात लगभग 11 बजे एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई। इस हादसे में तीन गौवंशों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल गौवंश अगले दिन दोपहर तक सड़क किनारे तड़पता रहा।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने गंभीर हादसे के बाद भी जिम्मेदार विभाग और स्थानीय प्रशासन समय पर कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए?

 

ग्रामीणों और गौसेवकों के अनुसार, दुर्घटना के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों ने मदद करने का प्रयास किया, लेकिन शासन-प्रशासन, नेशनल हाईवे अथॉरिटी और ग्राम पंचायत स्तर से अपेक्षित त्वरित व्यवस्था नहीं हो सकी।

 

बताया जा रहा है कि पंचायत प्रतिनिधियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सरपंच और सचिव द्वारा फोन तक रिसीव नहीं किया गया। वहीं नेशनल हाईवे अथॉरिटी की ओर से कथित तौर पर वाहन उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।

 

यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है—

 

क्या नेशनल हाईवे पर दुर्घटना होने के बाद घायल पशुओं या मृत पशुओं को हटाने की कोई तत्काल व्यवस्था नहीं है?

 

क्या सड़क दुर्घटना के बाद घंटों तक घायल जीव को तड़पते रहने देना व्यवस्था की विफलता नहीं है?

 

क्या ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित रह गई है?

 

जब जिम्मेदार विभाग और अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटते नजर आए, तब एक बार फिर स्थानीय ग्रामीणों और गौसेवकों को ही आगे आना पड़ा।

 

यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि जिम्मेदार व्यवस्था की संवेदनहीनता और लापरवाही पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

 

हम शासन-प्रशासन, नेशनल हाईवे अथॉरिटी और संबंधित ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों से मांग करते हैं कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए तत्काल आपातकालीन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

 

सवाल सिर्फ गौवंश का नहीं है… सवाल सड़क सुरक्षा, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का है।

 

अगर आज एक घायल गौवंश घंटों सड़क किनारे तड़पता रहा, तो कल किसी इंसान के साथ ऐसी घटना होने पर जिम्मेदारी कौन लेगा?

 

अब समय आ गया है कि जिम्मेदार विभाग जवाब दें और केवल जिम्मेदारी से बचने के बजाय जमीन पर कार्रवाई करें।

 

गौसेवकों की मांग

घायल पशु पक्षियों के लिए एम्बुलेंस एवं चिकित्सालय की व्यवस्था