बिलासपुरः प्रदेशभर के स्कूलों में त्रैमासिक परीक्षाएं सोमवार से शुरू होते ही विभाग की लापरवाही उजागर हो गई। परीक्षा के पहले दिन विभिन्न परीक्षा केंद्रों तक गोपनीय प्रश्नपत्र सामान्य डाक या सुरक्षित माध्यम के बजाय वाट्सएप ग्रुप्स के जरिए भेजे गए। वाट्सएप पर खुला पेपर कई अनाधिकृत लोगों के फोन तक पहुंचने से इसके लीक होने की प्रबल आशंका बन गई है।
लोक शिक्षण संचालनालय की व्यवस्था और निर्देशों के तहत आयोजित होने वाली त्रैमासिक परीक्षा का 30 प्रतिशत और छमाही परीक्षा का 35 प्रतिशत अंक सीधे मुख्य वार्षिक परीक्षा परिणाम में जुड़ता है। इतना महत्वपूर्ण वेटेज होने के बावजूद शिक्षा विभाग ने गोपनीयता की धज्जियां उड़ा दीं। विभागीय अफसरों का तर्क है कि पहले भी प्रश्नपत्र भेजने की यही परिपाटी रही है, लेकिन डिजिटल युग में कुछ ही मिनटों में पेपर अनगिनत निजी मोबाइलों में फारवर्ड हो गया।
सरकारी दावों के विपरीत बिना किसी सुरक्षा प्रोटोकाल के सीधे स्क्रीनशाट और पीडीएफ शेयर करने से परीक्षा की शुचिता तार-तार हो गई है। अगर समय रहते ऐसी लचर कार्यप्रणाली पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका सीधा असर छात्रों के शैक्षणिक भविष्य और मेरिट सूची पर पड़ेगा। जानकारों की माने तो जिम्मेदारों को चाहिए कि वे तकनीक की आड़ में गोपनीयता खत्म करने के बजाय प्रिंटेड और सीलबंद पैकेट में ही पेपर वितरण सुनिश्चित कराएं।
नियमों की अनदेखी से बिगड़ेगा छात्रों का रिजल्ट
डीपीआइ के स्पष्ट नियम हैं कि त्रैमासिक के 30 प्रतिशत और छमाही के 35 प्रतिशत अंक वार्षिक परिणाम का आधार बनते हैं। इतने अहम अंकों के बावजूद बिना सीलबंद व्यवस्था के खुले व्हाट्सएप से प्रश्नपत्र बांटना शिक्षा प्रणाली की गंभीर विफलता दर्शाता है। लापरवाही से होनहार विद्यार्थियों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा बना हुआ है।









