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धान खरीदी को लेकर पीसीसी चीफ दीपक बैज का सरकार पर तीखा हमला, धान खरीदी का समय एक महीने बढ़ाने की मांग

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धान खरीदी को लेकर पीसीसी चीफ दीपक बैज का सरकार पर तीखा हमला, धान खरीदी का समय एक महीने बढ़ाने की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि धान खरीदी की मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हो रही है और इसका सीधा नुकसान प्रदेश के लाखों किसानों को उठाना पड़ रहा है।

दीपक बैज ने मांग की कि धान खरीदी की समय-सीमा कम से कम एक माह और बढ़ाई जाए, ताकि सभी किसानों का धान खरीदा जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों किसानों को अब तक टोकन नहीं मिला है और जिन किसानों को टोकन मिला भी है, उनका धान समय पर नहीं खरीदा गया। बैज ने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार किसानों का धान खरीदना ही नहीं चाहती।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार की इस लापरवाही और उदासीनता के कारण किसान बुरी तरह परेशान हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई किसान मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार की बनती है।दीपक बैज ने राज्य की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।

कमिश्नर प्रणाली पूरी तरह फेल

राजधानी रायपुर में लागू की गई कमिशनर प्रणाली को पूरी तरह फेल बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके बावजूद हत्या, लूट और डकैती की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता में भय का माहौल है।

इसके अलावा, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयानों पर पलटवार करते हुए दीपक बैज ने कहा कि वे छत्तीसगढ़ आकर झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल सरकार पर 18 लाख पीएम आवास “खा जाने” का आरोप निराधार है। बैज ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर शिवराज सिंह चौहान का दावा सही है, तो वे सार्वजनिक रूप से सूची जारी करें और बताएं कि 2023 के बाद छत्तीसगढ़ में कितने नए पीएम आवास स्वीकृत हुए हैं।

दीपक बैज ने मनरेगा और अन्य योजनाओं को लेकर भी सरकार को घेरा और कहा कि राज्य सरकार के पास कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और रसोइयों को भुगतान करने तक के पैसे नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार नई योजनाओं में मजदूरों को भुगतान और 40 फीसदी हिस्सेदारी की राशि कहां से लाएगी।

कुल मिलाकर, धान खरीदी को लेकर दीपक बैज के बयान ने राज्य की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।

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