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वैलेंटाइन डे पर जानिए रानी की वाव की अमर प्रेम गाथा, ताजमहल से भी अनोखी मिसाल

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गुजरात। गुजरात के पाटन में स्थित ऐतिहासिक रानी की वाव वैलेंटाइन डे के अवसर पर सच्चे प्रेम के प्रतीक के रूप में एक अलग पहचान बनाकर सामने आती है। इसे पाटन का ताजमहल भी कहा जाता है,

लेकिन इतिहासकारों का मानना है कि यह प्रेम की ऐसी मिसाल है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। 11वीं सदी में रानी उदयमती ने अपने दिवंगत पति राजा भीमदेव की स्मृति में इस भव्य वाव का निर्माण करवाया था।

जमीन के भीतर बनी सात मंजिला यह संरचना सोलंकी वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है, जिसकी दीवारों पर हजारों बारीक मूर्तियां उकेरी गई हैं जो आज भी जीवंत प्रतीत होती हैं।

सरस्वती नदी के तट पर स्थित यह धरोहर सदियों तक मिट्टी में दबी रही, जिसे बाद में पुरातत्व विभाग ने खोजकर पुनर्स्थापित किया। यूनेस्को ने इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए इसे विश्व विरासत सूची में शामिल किया है और भारत सरकार ने इसे ₹100 के नोट पर भी स्थान दिया है।

इतिहासकारों के अनुसार, जहां अक्सर प्रेम के प्रतीक के रूप में ताजमहल का नाम लिया जाता है, वहीं रानी की वाव एक ऐसी विरासत है जिसे एक रानी ने अपने पति की स्मृति में बनवाया, जो न केवल जल संचय का अद्भुत उदाहरण है बल्कि प्रेम, आस्था और कला का जीवंत दस्तावेज भी है।

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