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मोह-माया छोड़कर राजधानी रायपुर के 8 लोग निकले वैराग्य की राह पर, माता-पिता के साथ उनके दोनों बेटे भी लेेंगे दीक्षा

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रायपुर। राजधानी रायपुर से जैन समाज के 8 लोग सांसारिक जीवन त्यागकर वैराग्य जीवन की राह पर निकल पड़े हैं. इनमें कपड़ों का कारोबार करने वाले आशीष सुराना के साथ उनकी पत्नी रितु सुराना और उनके दोनों बेटे आर्यन और आरूष शामिल हैं. ये सभी 8 फरवरी को मुम्बई में जैन दीक्षा ग्रहण करेंगे.

नगर के युवा सुश्रावक यश संकलेचा ने बताया रायपुर के अलग-अलग परिवारों से जुड़े इन 8 दीक्षार्थियों में उनकी 47 वर्षीय माता एकता संकलेचा और 49 वर्षीय पिता शैलेंद्र संकलेचा भी शामिल हैं. सभी दीक्षार्थियों को विदा करने के लिए बीते 2 फरवरी को रायपुर का पूरा जैन समाज रेलवे स्टेशन पर उमड़ पड़ा था. इस दौरान दीक्षार्थी आखिरी बार राजशाही वस्त्रों में नजर आए.

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देशभर से 64 मुमुक्षु लेंगे दीक्षा

दीक्षा से पहले 25-26 जनवरी को रायपुर के इंडोर स्टेडियम बूढ़ापारा में विदाई समारोह आयोजित किया गया था. इसके बाद 8 फरवरी को मुंबई के बोरीवली में ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव संयमरंग का आयोजन होगा, जहां रायपुर के इन 8 मुमुक्षुओं के साथ देशभर से कुल 64 मुमुक्ष आचार्य भगवंत विमल सागर महाराज, आचार्य भगवंत विजय योगतिलक सूरीश्वर महाराज और उनके शिष्य-प्रशिष्यों से दीक्षा लेंगे.

यश संकलेचा ने बताया कि उनके पिता शैलेंद्र संकलेचा रायपुर में वस्त्रों का बड़ा व्यवसाय करते थे, जिसे वे परिवार को सौंपकर संयम मार्ग अपना रहे हैं. वहीं आम्रपाली सोसायटी निवासी आशीष सुराना ने अपना बैग का होलसेल बिजनेस छोड़ा और पत्नी रितु सुराना तथा दोनों बेटों आर्यन व आरुष के साथ मुमुक्ष बनने का निर्णय लिया है. 26 वर्षीय सुरभि भंसाली ने फूड टेक्नोलॉजी में मास्टर्स करने के बाद वैराग्य का मार्ग चुना. दुनिया की सैर करने का स्वप्न देखने वाली सुरभि ने इसी चातुर्मास में ज्ञानार्जन के उपरांत सांसारिक जीवन त्यागकर साध्वी बनने का संकल्प ले लिया.

धर्मनगरी रायपुर के 8 दीक्षार्थी

शैलेंद्र संकलेचा, (49 वर्ष), एकता संकलेचा (47 वर्ष), आशीष सुराना (42 वर्ष), रितु सुराना (40 वर्ष), आर्यन सुराना (16 वर्ष), आरुष सुराना (14 वर्ष), सुरभि भंसाली (26 वर्ष), और तनिष सोनिगरा (13 वर्ष

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