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कोरबा में 7 वर्षीय मासूम से अनाचार और हत्या: जनता का फूटा गुस्सा, एसपी सिद्धार्थ तिवारी को हटाने की उठी मांग. Video

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Acn18. Com.छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की एक अत्यंत ही मर्मस्पर्शी, झकझोर देने वाली और आक्रोशित करने वाली घटना से प्रदेश स्तब्ध है.रजगामार क्षेत्र में 7 साल की मासूम बच्ची के अपहरण, उसके बाद उसके साथ हुए जघन्य अनाचार (दुष्कर्म) और निर्मम हत्या की घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस अमानवीय और हृदयविदारक घटना के बाद से कोरबा की आम जनता में भारी आक्रोश है और चारों तरफ से पुलिस अधीक्षक (एसपी) सिद्धार्थ तिवारी को तत्काल हटाने की मांग तेज हो गई है।घटना के सामने आने के बाद से ही कोरबा की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा है। न्याय की गुहार लगाते हुए शहर का हर वर्ग—चाहे वह वकील हों, राजनेता, समाजसेवी, ग्रामीण या शहरी हो , सभी सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज करा रहे है। लोगों का कहना है कि पुलिस प्रशासन और एसपी के लचर नेतृत्व के कारण आज अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि मासूमों की जिंदगियों से भी खिलवाड़ किया जा रहा है।

 

प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक इस घटना के असल दोषियों को कठोरतम सजा नहीं मिलती और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक इस तरह की घटनाओं पर अंकुश नहीं लगाया जा सकेगा

 

*​एसपी सिद्धार्थ तिवारी के कार्यकाल पर गंभीर सवाल*

 

​स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों का आरोप है कि जिला बनने के बाद से कोरबा में एसपी सिद्धार्थ तिवारी का कार्यकाल सबसे निराशाजनक और कमजोर रहा है।

एसपी के नेतृत्व में जिले में अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। झूठे मुकदमों, हत्या, अनाचार, लूट, डकैती, और जानलेवा दुर्घटनाओं के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है।

​अवैध गतिविधियों का गढ बनते क्षेत्र में रेत चोरी, कबाड़ चोरी, डीजल चोरी और खाद्यान्न चोरी जैसी अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने में पुलिस पूरी तरह विफल साबित हुई है।

 

*​पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल*

 

7 साल की मासूम के अपहरण के मामले में भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। परिजनों का आरोप है कि पुलिस समय रहते ठोस कदम उठाने के बजाय सिर्फ ‘हवा में हाथ-पांव मारती’ रही और अंततः बच्ची का शव ही उसके परिजनों को नसीब हुआ।

*​राजनीतिक संरक्षण और जनता की गुहार*

​सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में यह सवाल भी जोर-शोर से उठ रहा है कि आखिर तमाम शिकायतों और खराब कानून-व्यवस्था के बावजूद राज्य सरकार एसपी सिद्धार्थ तिवारी पर कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रही है? जनता के बीच इस बात की चर्चा है कि कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण के चलते उन्हें बचाया जा रहा है।

​आक्रोशित जनता और पीड़ित परिवार की यही पुकार है कि यदि वर्तमान सरकार कोरबा के नागरिकों को भी छत्तीसगढ़ का ही हिस्सा मानती है, तो इस गंभीर घटना को नजरअंदाज न किया जाए। जनता की मांग है कि

​एसपी सिद्धार्थ तिवारी को तुरंत कोरबा जिले से हटाया जाए।

​ और उन्हें अन्य जिले में भेजने के बजाय किसी प्रशासनिक दफ्तर में अटैच किया जाए, ताकि अन्य कोई जिला इस तरह के दर्द को सहने के लिए विवश न हो।

 

​यह घटना न सिर्फ कोरबा पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा धब्बा है, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। अब देखना यह होगा कि प्रदेश की विष्णुदेव साय सरकार इस संवेदनशील मामले और जनता के भारी आक्रोश पर क्या कड़ा कदम उठाती है।

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