Acn18. Com.छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ पति ही नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार परिवार के अन्य सदस्य भी कानून के दायरे में आ सकते हैं। हाईकोर्ट ने बहू और उसके मायके पक्ष के रिश्तेदारों की याचिका खारिज कर दी।
मामला रायपुर की निर्मला अग्निवंशी और उनकी बेटी श्रुति अग्निवंशी से जुड़ा है। दोनों ने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत अपनी बहू अनिशा अग्निवंशी और उसके मायके पक्ष के पांच लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए थे। वहीं, बहू और उसके परिजनों ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि वे शिकायतकर्ताओं के साथ साझा घर में नहीं रहते, इसलिए घरेलू हिंसा कानून के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शुरुआती स्तर पर इन विवादित तथ्यों का फैसला नहीं किया जा सकता। आरोपों की सच्चाई जानने के लिए साक्ष्य और गवाहों का परीक्षण जरूरी है।
कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही खत्म करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। यानी अब मामले में आरोपों की वास्तविकता ट्रायल के दौरान सामने आएगी।





