पूरे भारत को ऊर्जा प्रदान करने वालों में अग्रणी भूमिका निभाने वाला कोरबा अब अपराध के मामले में भी किसी शहर से पीछे नहीं रहना चाहता तभी तो आए दिन दिल दहला देने वाली घटनाएं कोरबा में घटित हो रही है। बीती रात एक बस्ती में घंटो लाठी डंडे चलते रहे एक युवक की मौत हो गई उसके बाद ही पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी मौका ए वारदात पर पहुंचे.
कोरबा के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी अपने वातानुकूलित शयनकक्ष में विश्राम कर रहे थे और इधर शहर के बीचों-बीच बसे रामसागर मोहल्ले में खूनी संघर्ष चल रहा था
रामसागर मोहल्ले के लोगों ने देखा कि अचानक एक युवक दर्जन भर युवकों के साथ पहुंचा और एक घर पर आक्रमण कर दिया. लोग कुछ समझा या कर पाते तब तक कई लोगों पर लाठी डंडों से प्रहार शुरू कर दिया गया था. रवि यादव नामक एक युवक को सरे राह इतना पीटा गया कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
युवक की हत्या करने और अन्य लोगों की बेरहमी से पिटाई करने के बाद अन्य मोहल्ले से आए युवक लाठी डंडा और तलवार लहराते हुए मौके से भाग निकले.
*अपराधियों के भागने के बाद पहुंची पुलिस*
अराजक तत्वों ने खुलेआम अपनी मनमानी कर ली , एक युवक की हत्या कर दी . बस्ती के लोग प्रतिकार करने के बावजूद युवक के प्राण नहीं बचा सके वे लोग हाथ मलते पुलिस प्रशासन को कोस रहे थे तभी वहां फिल्मी अंदाज में आगमन होता है कोरबा के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी का. कप्तानी का रौब दिखाते हुए वह अपने अधीनस्थों को निर्देश देने की औपचारिकता पूरी करते हैं और फिर वापस लौट जाते हैं. उनके जाने के बाद अन्य थानों से भी पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी दरी रोड रामसागर पारा पहुंचते हैं और स्थिति को नियंत्रण में करने का दावा करते हैं.
*बस्ती वालों ने कहा अब क्या नियंत्रित करोगे*
बस्ती के लोग पूछते नजर आए कि आखिर नियंत्रण किस पर कर रहे हो। खुलेआम गुंडागर्दी की गई ,काफी देर तक मारपीट की जाती रही उस समय तो नियंत्रित करने पुलिस का कोई अधिकारी कर्मचारी नहीं पहुंचा ।अब जब एक युवक की मौत हो गई है ,बस्ती के लोग भयभीत हैं ,तब आप क्या नियंत्रित करेंगे
पता चला है कि पुलिस ने कुछ युवकों को हिरासत में ले लिया है बाकी की तलाश जारी है
*हर रोज हो रही है ऐसी घटनाएं*
रामसागर पारा में रवि यादव की हुई हत्या के मामले में बताया जा रहा है की कुछ दिन पहले हमलावर लड़कों से रामसागर के किसी युवक का विवाद हुआ था जिसका बदला लेने के लिए यह हमला किया गया. अब सवाल यह उठ रहा है की जब पहले विवाद हुआ था तो निश्चित ही वह मामूली तो रहा नहीं होगा क्योंकि यदि मामूली विवाद होता तो इस तरह युवाओं का समूह किसी बस्ती में हमला करने की जुर्रत ना करता. विवाद गंभीर हुआ रहा होगा तो फिर इसकी सूचना पुलिस को क्यों नहीं मिली और यदि पुलिस को मिली तो फिर एहतियातन कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह सवाल उठना लाजिमी है।
सवाल तो यह भी उठ रहा है कि आखिर हो क्या गया है हमारे कोरबा को जो प्रतिदिन इस तरह की घटनाएं घट रही हैं
2 दिन पहले ही सीतामढ़ी में एक ट्रक ड्राइवर को कुछ लोगों ने अर्धरात्रि को दौड़ा-दौड़ा कर जिस तरह से पीटा था अभी वह लोग भूल भी नहीं पाए हैं तभी यह घटना घटित हो गई।
दरोगा के बेटे की निर्मम पिटाई की जाती है। उसके साथी युवा पत्रकार को घेर कर लगभग तीन दर्जन लोग तब तक मांरते हैं जब तक वह बेहोश नहीं हो जाता, दरोगा के इकलौते बेटे की मौत हो जाती है, पुलिस की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं दिखाई देता.
वर्तमान पुलिस अधीक्षक के पूरे कार्यकाल पर यदि दृष्टि डाली जाती है तो पता चलता है कि इतने जघन्य अपराध इतने कालखंड में पहले कभी नहीं हुए थे.



