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रिव्यू की अनुमति देने से पहले सुनवाई जरूरी, हाईकोर्ट ने कमिश्नर का आदेश किया रद्द।।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राजस्व मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि किसी पुराने आदेश के रिव्यू की अनुमति देने से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर देना जरूरी है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने बालोद जिले के डौंडीलोहारा तहसील निवासी ईश्वर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दुर्ग संभाग के कमिश्नर द्वारा 5 मई 2020 को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कलेक्टर को 17 सितंबर 2018 के अपने आदेश का रिव्यू करने की अनुमति दी गई थी। दरअसल याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि रिव्यू की अनुमति देने से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 51 का हवाला देते हुए कहा कि किसी आदेश को बदलने या पलटने से पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का मौका देना अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रिव्यू की अनुमति महज औपचारिक या यांत्रिक तरीके से नहीं दी जा सकती, बल्कि अनुमति देने वाले अधिकारी को न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करते हुए मामले पर अपना दिमाग लगाना होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि रिव्यू की अनुमति देने से पहले प्रभावित पक्ष यह बता सकता है कि मामला रिव्यू के योग्य नहीं है या लंबे समय बीत जाने के कारण अब रिव्यू की शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि ईश्वर सिंह को सुनवाई का अवसर दिए बिना कमिश्नर ने अनुमति दी और आदेश में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल नहीं किया गया। इसलिए आदेश निरस्त करते हुए मामला दोबारा कमिश्नर, दुर्ग संभाग को भेज दिया गया है। कमिश्नर को याचिकाकर्ता और प्रतिवादी क्रमांक-5 को सुनकर रिव्यू की अनुमति के सवाल पर नए सिरे से आदेश पारित करना होगा। इसके लिए पहली सुनवाई की तारीख से तीन महीने की समय-सीमा तय की गई है। याचिका को इसी सीमा तक मंजूर किया गया है।