Acn18. Com धमतरी.धमतरी जिले के नगरी-सिहावा अंचल में एक ऐसा गणेश मंदिर है, जहां मान्यता है कि भगवान गणेश की मूर्ति किसी ने स्थापित नहीं की, बल्कि वे स्वयं धरती से प्रकट हुए थे। करीब 200 साल पुरानी यह आस्था आज भी हजारों श्रद्धालुओं को यहां खींच लाती है।
कहानी ग्राम गढ़डोंगरी की है। स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक मालगुजारी के दौर में एक मालगुजार जंगल में शिकार के लिए निकले थे। पहाड़ की तलहटी में चलते वक्त उनका पैर एक पत्थर से टकराया।
रात में उन्हें सपना आया कि जिस पत्थर से पैर टकराया था, वहां भगवान गणेश का स्वरूप मौजूद है। सुबह ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचे और मिट्टी हटाई गई, तो गणेश जी का स्वरूप दिखाई दिया।
इसके बाद यहां पूजा-अर्चना शुरू हुई और धीरे-धीरे यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र बन गया। मान्यता है कि श्रद्धालु यहां मनोकामना लेकर पहुंचते हैं और गणेश जी से सुख-समृद्धि व संतान प्राप्ति की कामना करते हैं।
आज भी गणेश महोत्सव के दौरान यहां विशेष रौनक रहती है, लेकिन श्रद्धालुओं का आना-जाना पूरे साल जारी रहता है।
जंगल और पहाड़ों के बीच मौजूद यह स्वयंभू गणेश मंदिर आज भी करीब दो शताब्दियों पुरानी लोकआस्था और विश्वास की कहानी कह रहा है।









