छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पहले से दो साल की स्टडी लीव लेकर पीजी की पढ़ाई कर चुके डॉक्टरों को एक साल की अतिरिक्त स्टडी लीव देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने इस संबंध में दायर 13 डॉक्टरों की याचिकाएं खारिज कर दीं। डॉक्टरों ने शासन के 3 मार्च 2025 के आदेश का हवाला देते हुए अपनी दो साल की स्टडी लीव को बढ़ाकर तीन साल करने की मांग की थी।दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के इन डॉक्टरों को पहले पीजी की पढ़ाई के लिए दो साल की स्टडी लीव मिली थी। इसके बाद उन्होंने एक साल का असाधारण अवकाश लिया था। शासन ने 3 मार्च 2025 को नियमों में छूट देते हुए पीजी की पढ़ाई के लिए अधिकतम 36 महीने की स्टडी लीव की अनुमति दी थी। डॉक्टरों का तर्क था कि इस आदेश का लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए। वहीं, शासन ने कहा कि नया आदेश पहले से स्वीकृत और उपयोग की जा चुकी स्टडी लीव पर लागू नहीं होगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 36 महीने की स्टडी लीव की अनुमति देने वाले शासन के आदेश में पहले से स्वीकृत 24 महीने के अवकाश को स्वतः बढ़ाकर 36 महीने करने का प्रावधान नहीं है। बाद में जारी आदेश को पुराने मामलों पर पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 3 मार्च 2025 के बाद अनुमति लेकर उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले डॉक्टरों को ही नई व्यवस्था का लाभ मिलेगा। इसलिए याचिकाकर्ता डॉक्टरों को अतिरिक्त 12 महीने की स्टडी लीव देने का कोई कानूनी आधार नहीं है।





