बिलासपुर अस्पताल में पथरी के इलाज के दौरान आरक्षक की संदिग्ध मौत हो गई जिसके बाद प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी है, जिसके पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल में पथरी के इलाज के दौरान आरक्षक सत्यकुमार पाटले की मौत ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में विरोध-प्रदर्शन किया, जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए।
इलाज को लेकर परिजनों के आरोप
परिवार का कहना है कि सत्यकुमार को पेट दर्द की शिकायत पर भर्ती किया गया था और पथरी की समस्या बताकर ऑपरेशन किया गया। आरोप है कि बिना चीरा लगाए प्रक्रिया की गई और ऑपरेशन के अगले दिन तक वह ठीक थे, लेकिन शाम होते-होते उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजनों ने यह भी कहा कि करीब चार घंटे तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज को देखने नहीं पहुंचा, जिससे उसकी स्थिति और खराब हो गई। उधर अस्पताल संचालक डॉ. अमित सोनी ने इन आरोपों से इंकार करते हुए दावा किया कि मौत लापरवाही से नहीं, बल्कि हार्ट अटैक के कारण हुई है।
अस्पताल में तनाव, पुलिस बल तैनात
कॉन्स्टेबल की मौत की खबर फैलते ही परिवारजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में भारी हंगामा किया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस अधिकारी और बल मौके पर पहुंचे और परिजनों को शांत करवाया। परिजनों ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया जाता, तो उसकी जान बच सकती थी। पुलिस अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया, जिसके बाद माहौल शांत हुआ, लेकिन परिजन डॉक्टरों और प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे।
अस्पताल परिसर में हंगामा
सिम्स के चार डॉक्टरों ने किया पोस्टमार्टम
जिला प्रशासन ने मौत को संदिग्ध मानते हुए विस्तृत जांच शुरू की। पहले जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने की कोशिश की गई, लेकिन विशेषज्ञ टीम उपलब्ध न होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। जिसके बाद सिम्स में चार डॉक्टरों की टीम गठित की गई, जिसने शाम करीब 5 बजे पोस्टमार्टम किया। इस दौरान कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार आकाश गुप्ता भी मौजूद रहे और अस्पताल स्टाफ से पूछताछ की। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और बिना किसी दबाव के हो। पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
जांच किस बिंदु पर केंद्रित?
जांच टीम यह पता लगाने पर जोर दे रही है कि जब मरीज की हालत बिगड़ी, उस समय कौन-कौन से डॉक्टर ड्यूटी पर थे और उन्होंने क्या उपचार किया। परिजन लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि अस्पताल प्रबंधन से उनका भरोसा उठ चुका है और यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर गलती है। अब परिजन और प्रशासन, दोनों को सिम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।




