Acn18. Com.चेक बाउंस के मामलों में आर्थिक नुकसान झेल रहे शिकायतकर्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। न्याय व्यवस्था में हुए एक बड़े और महत्वपूर्ण कानूनी बदलाव के तहत अब यदि चेक बाउंस के मामले में आरोपित बरी (अक्विट) हो जाता है, तो शिकायतकर्ता (पीड़ित पक्ष) को अपील के लिए हाई कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। शिकायतकर्ता अब सीधे संबंधित सेशन कोर्ट में अपील दाखिल कर सकेगा।
उच्चतम न्यायालय के न्याय दृष्टांतों के आलोक में यह व्यवस्था स्पष्ट की गई है कि चेक बाउंस होने से वित्तीय नुकसान उठाने वाला शिकायतकर्ता भी कानून की नजर में ‘पीड़ित’ है, इसलिए उसे आपराधिक मामलों की तर्ज पर बरी किए गए आरोपित के खिलाफ अपील का सीधा अधिकार है।
पहले क्या थी व्यवस्था और अब क्या बदला?
पहले की प्रक्रिया: नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत जब कोई ट्रायल कोर्ट आरोपी को बरी कर देता था, तो शिकायतकर्ता को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 378(4) के तहत अपील करने के लिए सबसे पहले हाई कोर्ट से विशेष अनुमति (Special Leave to Appeal) लेनी पड़ती थी। अनुमति मिलने की लंबी प्रक्रिया में पीड़ितों का काफी समय और पैसा खर्च होता था।
अब नई व्यवस्था: न्यायालयों द्वारा दिए गए नवीन निर्णयों के अनुसार अब शिकायतकर्ता को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 413 (पूर्ववर्ती CrPC की धारा 372 के परंतुक) के तहत ‘पीड़ित’ माना गया है। इसके तहत आरोपित के बरी होने पर शिकायतकर्ता को आदेश की प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर सीधे जिला एवं सत्र न्यायालय (Session Court) में अपील करने की स्वतंत्रता होगी। इसके लिए हाई कोर्ट से पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं रहेगी।
कोरबा के शिकायतकर्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा
छत्तीसगढ़ के औद्योगिक एवं व्यापारिक केंद्र कोरबा जिला के परिवादियों के लिए भी यह आदेश बड़ी राहत लेकर आया है। कोरबा जिला न्यायालय और अनुविभागीय अदालतों (कटघोरा आदि) में चेक बाउंस के सैकड़ों मामले लंबित रहते हैं।
समय और आर्थिक बचत: कोरबा के जिन शिकायतकर्ताओं के मामले में निचली अदालत से आरोपी बरी हो जाते थे, उन्हें बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय तक दौड़ लगानी पड़ती थी और वकीलों की फीस व आवागमन का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ता था। अब सीधे कोरबा जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील दायर होने से समय और धन दोनों की बचत होगी।
मामलों का त्वरित निस्तारण: स्थानीय स्तर पर ही सेशन कोर्ट में सुनवाई होने से परिवादियों को जल्द न्याय मिल सकेगा और कानूनी प्रक्रिया में होने वाली देरी पर अंकुश लगेगा।
व्यापारियों व आम नागरिकों में भरोसा: कारोबार और निजी लेन-देन में चेक बाउंस की समस्या से जूझ रहे स्थानीय व्यवसायियों और नागरिकों का कानूनी प्रक्रिया पर विश्वास और सुदृढ़ होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से देश भर के साथ-साथ कोरबा जिले के भी उन सैकड़ों पीड़ितों को सीधा न्याय मिलेगा, जो प्रक्रिया की जटिलता के कारण बिलासपुर हाईकोर्ट जाने से हिचकते थे।





