Home छत्तीसगढ़ सेवा की कहानी: नियमित राशन से रामबाई के परिवार को खाद्य सुरक्षा...

सेवा की कहानी: नियमित राशन से रामबाई के परिवार को खाद्य सुरक्षा का संबल, अब दूसरी जरूरतों के लिए बच रही मजदूरी की कमाई

0
4

उचित मूल्य दुकान से हर महीने मिल रहे 35 किलो चावल सहित अन्य खाद्यान्न, भोजन की चिंता हुई कम
पहले बाजार से चावल खरीदने में खर्च होता था कमाई का हिस्सा, अब घरेलू बजट को मिली राहत
रामबाई ने कहाकृनियमित राशन से परिवार के खाने-पीने का मिल रहा बड़ा सहारा

रायपुर, 24 सितम्बर 2026

1790250373 38d061b27cfc51439995

रोज मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाने वाली रामबाई के लिए कमाई का एक बड़ा हिस्सा कभी घर के राशन की व्यवस्था में खर्च हो जाता था। मजदूरी के पैसे मिलते ही सबसे पहले बाजार से चावल खरीदने की चिंता रहती थी। अब उचित मूल्य दुकान से नियमित खाद्यान्न मिलने से अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सकालो निवासी श्रीमती रामबाई के परिवार की यह चिंता काफी हद तक कम हुई है। हर महीने 35 किलो चावल के साथ शक्कर, चना और नमक मिलने से परिवार की भोजन संबंधी जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है और बाजार से चावल खरीदने पर होने वाला खर्च बचने से सीमित आय का उपयोग दूसरी घरेलू जरूरतों के लिए हो पा रहा है।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत अपनी ‘सेवा की कहानी’ साझा करते हुए रामबाई बताती हैं कि उनका परिवार मजदूरी पर निर्भर है। पहले मजदूरी से मिलने वाली आय से ही राशन खरीदना पड़ता था। सीमित आमदनी का हिस्सा भोजन की व्यवस्था में खर्च होने के कारण परिवार की दूसरी आवश्यकताओं के लिए कम राशि बचती थी।
मजदूरी मिलते ही पहले करनी पड़ती थी राशन की व्यवस्था
रामबाई बताती हैं कि पहले मजदूरी के पैसे मिलने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता घर के लिए चावल और अन्य राशन खरीदना होती थी। चावल खरीदने में ही कमाई का एक हिस्सा चला जाता था। सीमित आय वाले परिवार के घरेलू बजट पर इसका सीधा असर पड़ता था। अब उचित मूल्य दुकान से नियमित रूप से खाद्यान्न मिलने से परिवार को राहत मिली है। रामबाई के अनुसार उन्हें हर महीने 35 किलो चावल के साथ शक्कर, चना और नमक मिलता है। इससे भोजन की जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा हो रहा है और बाजार से अलग से चावल खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।
नियमित राशन से भोजन की चिंता हुई कम
मजदूरी पर निर्भर परिवार के लिए नियमित राशन की उपलब्धता ने घर की रसोई चलाना आसान किया है। पहले बाजार से चावल खरीदने के लिए मजदूरी की कमाई का इंतजार करना पड़ता था। अब उचित मूल्य दुकान से राशन मिलने के कारण भोजन की व्यवस्था अधिक नियमित हुई है। राशन पर होने वाला खर्च कम होने का लाभ परिवार के घरेलू बजट में भी दिखाई दे रहा है। मजदूरी से मिलने वाली सीमित आय का बचा हिस्सा अब परिवार की दूसरी आवश्यकताओं के लिए उपयोग किया जा रहा है।
“हमारे परिवार के खाने-पीने के लिए बहुत सहारा हो रहा है”
खाद्यान्न सुविधा से मिले लाभ के बारे में रामबाई कहती हैं, “अब राशन के लिए हमें दिक्कत नहीं हो रही है। सोसाइटी से चावल निशुल्क और दूसरी सामग्री मिल जाती है। हमारे परिवार के खाने-पीने के लिए इससे बहुत सहारा हो रहा है।” उन्होंने इस सुविधा के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नियमित राशन मिलने से उनके जैसे मजदूरी करने वाले परिवारों को घर चलाने में बड़ी मदद मिल रही है।
सेवा संकल्प अभियान के तहत रामबाई की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि खाद्यान्न की नियमित उपलब्धता जरूरतमंद परिवारों के लिए केवल भोजन की व्यवस्था तक सीमित नहीं है। राशन पर होने वाले खर्च में बचत परिवार की सीमित आय पर दबाव कम कर दूसरी जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने की गुंजाइश भी बढ़ा रही है।

error: Content is protected !!