बिलासपुर। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अटैच की गई संपत्तियों को लेकर दायर याचिकाओं पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मेसर्स मोक्षित कार्पोरेशन और उनके सहयोगियों की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
PMLA में अटैचमेंट के खिलाफ वैधानिक प्रक्रिया उपलब्ध
हाई कोर्ट ने कहा कि PMLA के तहत संपत्ति अटैचमेंट के खिलाफ पूरी वैधानिक प्रक्रिया उपलब्ध है। ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों को पहले कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सीधे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अटैचमेंट को चुनौती देना सुनवाई योग्य नहीं है, जब संबंधित कानून के तहत प्रभावी वैधानिक उपाय उपलब्ध हो।
पहले सक्षम प्राधिकरण के समक्ष रखनी होगी आपत्ति
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि PMLA के तहत संपत्ति अटैचमेंट से जुड़ी सभी आपत्तियां पहले सक्षम प्राधिकरण के समक्ष रखी जा सकती हैं। इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया और मंच उपलब्ध है।
हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद याचिकाकर्ताओं को अब संपत्ति अटैचमेंट से संबंधित अपनी आपत्तियों के लिए PMLA के तहत निर्धारित प्रक्रिया का सहारा लेना होगा।
मामले में ED ने मेसर्स मोक्षित कार्पोरेशन और उनके सहयोगियों से जुड़ी संपत्तियों को अटैच किया है। हाई कोर्ट ने वैकल्पिक वैधानिक उपाय उपलब्ध होने के आधार पर दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया।





