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एचएमएस में घमासान: 2.86 करोड़ के कथित गबन के आरोपों से गरमाई श्रमिक राजनीति, नाथूलाल पांडे ने किया पलटवार

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बिलासपुर/कोरबा। एसईसीएल के सबसे बड़े श्रमिक संगठन हिंद मजदूर सभा (HMS) में लंबे समय से चल रहा अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। संगठन के महासचिव नाथूलाल पांडे द्वारा दीपका-गेवरा इकाई के वरिष्ठ नेता रेशम लाल यादव एवं उनकी टीम को भंग किए जाने के बाद श्रमिक राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है।

 

विवाद उस समय और गहरा गया, जब संगठन के कुछ पूर्व एवं वर्तमान पदाधिकारियों ने महासचिव नाथूलाल पांडे पर 2 करोड़ 86 लाख रुपये के कथित गबन का आरोप लगाया। आरोप है कि पिछले करीब 14 वर्षों में मजदूरों से सदस्यता शुल्क के रूप में प्राप्त राशि का एक हिस्सा एक निजी कंपनी को ऋण के रूप में दिया गया। आरोप लगाने वालों का दावा है कि संबंधित कंपनी में पहले नाथूलाल पांडे स्वयं निदेशक थे और बाद में उनके परिजनों को निदेशक बनाया गया। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की राशि वापस नहीं आई या उसे माफ कर दिया गया।

 

हालांकि, महासचिव नाथूलाल पांडे ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक और संगठनात्मक द्वेष से प्रेरित है। उन्होंने दावा किया कि जिस समय कथित वित्तीय लेन-देन हुआ, उस समय आरोप लगाने वाले कई पदाधिकारी स्वयं संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर थे और उन्हें सभी प्रक्रियाओं की जानकारी थी।

 

नाथूलाल पांडे ने यह भी कहा कि इस मामले की जांच रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा पहले ही की जा चुकी है और जांच में उनके विरुद्ध कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ। उनका कहना है कि सदस्यता शुल्क की राशि का केवल 50 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय संगठन के पास आता था, जबकि शेष 50 प्रतिशत संबंधित यूनिटों के पास रहता था। ऐसे में यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का प्रश्न उठता है, तो उसकी जवाबदेही केवल केंद्रीय नेतृत्व पर नहीं डाली जा सकती।

 

इधर, संगठन से निष्कासन के बाद रेशम लाल यादव अपनी पूरी टीम के साथ “कोयला मजदूर पंचायत” में शामिल हो गए हैं। इसे एचएमएस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। श्रमिक संगठनों से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम से एसईसीएल क्षेत्र की यूनियन राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

 

फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।