सीएसईबी कोरबा प्लांट की स्क्रैप नीलामी विवाद अब ठेकेदारों के सामूहिक असंतोष में बदल गया है। राहुल ट्रेडर्स के अशोक अग्रवाल समेत अन्य ठेकेदारों का कहना है कि यह मामला सिर्फ गड़बड़ी नहीं, बल्कि गंभीर वित्तीय क्षति का है। ठेकेदारों का आरोप है कि निविदा में जिसका उल्लेख तक नहीं था, वैसे ट्रांसफॉर्मर को बिक्री के बाद “चोरी कर” बाहर निकालकर बेच दिया गया।
*ठेकेदारों का आरोप*
ठेकेदारों के अनुसार, उक्त ट्रांसफॉर्मर का निविदा दस्तावेज में कहीं भी जिक्र नहीं था। उनका दावा है कि रायपुर से आए अधिकारी सुनील चौहान ने अपने “चहते ठेकेदार” नितेश अग्रवाल को अतिरिक्त लाभ पहुंचाने के लिए यह काम किया। ठेकेदारों का आरोप है कि बिक्री प्रक्रिया पूरी होने के बाद लगभग 3 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले दोनों ट्रांसफॉर्मर को चोरी कर एक खास फर्म के हाथों बेच दिया गया।
अशोक अग्रवाल ने पहले भी कहा था कि उन्हें नीलामी के समय ट्रांसफॉर्मर दिखाया ही नहीं गया था और बाद में सेटिंग कर उसे बेच दिया गया। अब अन्य ठेकेदारों का भी यही कहना है कि इस मामले को लेकर उनमें भारी दर्द और असंतोष है। उनका आरोप है कि कुछ अधिकारियों द्वारा विद्युत मंडल को “खोखला” किया जा रहा है।
*अभी आरोप ही हैं*
यह सभी बयान ठेकेदारों के हैं। सीएसईबी प्रबंधन, सुनील चौहान या जिन ठेकेदारों पर आरोप लगे हैं, उनकी ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। नीलामी दस्तावेज में भी ट्रांसफॉर्मर का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
*जांच की मांग तेज*
उद्योग मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि अनियमितता पाई गई तो जांच होगी। ठेकेदारों ने अब माल उठान के गेट पास, डिलीवरी चालान और सीसीटीवी/वीडियोग्राफी सार्वजनिक करने की मांग दोहराई है ताकि सच्चाई सामने आ सके।




