
पढ़ने-लिखने की उम्र में प्यार का ऐसा बुखार चढ़ा है कि मौत भी मजाक लगने लगी है! खरगोन के बड़वाह में जो हुआ, वो न तो वीरता है और न ही प्रेम… ये सीधे तौर पर मानसिक दिवालियापन है। एक 15 साल की बच्ची 150 फीट ऊंचे टॉवर पर चढ़ जाती है। क्यों? क्योंकि उसके बालिग प्रेमी की सगाई कहीं और हो गई। धिक्कार है ऐसी परवरिश और ऐसी सोच पर! नीचे मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल था, प्रशासन घंटों मिन्नतें करता रहा, लेकिन ये ‘मजनू की लैला’ नीचे उतरने को तैयार नहीं थी। हद तो तब हो गई जब उसने अपने उस प्रेमी को बुलाने की जिद की, जिसने पहले ही उसका साथ छोड़ दिया था। जहर खाने से मन नहीं भरा, तो अब टॉवर को ही सुसाइड पॉइंट बना लिया? वाह रे ‘निब्बा-निब्बी’ वाला प्यार! सोचिए, उस जीजा पर क्या गुजरी होगी जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर इस सिरफिरी को नीचे उतारा। ये प्रेम नहीं, ये वो सोशल मीडिया और वेब सीरीज का कचरा है जो 15 साल के बच्चों के दिमाग में भरा जा रहा है। सगाई प्रेमी की हुई, और जान देने की नौबत बच्ची की आ गई? क्या इसी दिन के लिए मां-बाप ने पाल-पोसकर बड़ा किया था?
प्रशासन काउंसलिंग कर रहा है, लेकिन सवाल समाज से है। कब तक हम इन हरकतों को ‘बचपना’ कहकर टालते रहेंगे? आज टॉवर है, कल कुछ और होगा। अगर वक्त रहते इन भटके हुए कदमों को नहीं रोका गया, तो हर गांव की ऊंची इमारतें ऐसे ही खूनी ड्रामे का गवाह बनेंगी। प्यार के नाम पर ये तमाशा बंद होना चाहिए!



