एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों का धैर्य आज जवाब दे गया.पुनर्वास, बसाहट और रोजगार जैसी मूलभूत मांगों को लेकर ग्राम पंचायत के नेतृत्व में आज सुबह 7:00 बजे से ग्रामीणों ने भठोरा फेस का खदान बंद कर दिया. आंदोलन के कारण खदान में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया ।ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में जिला प्रशासन एसईसीएल प्रबंधन और ग्राम नराईबोध के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में कई अहम समझौतों पर सहमति बनी थी लेकिन आज तक उन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया गया है ।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें हैं कि
प्रभावित ग्रामीणों को उचित बसाहट स्थल और वहां नागरिक सुविधाएं प्रदान कि जाय.


पूर्व में छूटे हुए मकानों की जीपीएस के माध्यम से पारदर्शी नापी और उचित मुआवजा दिया जाय,समझौते के अनुसार आउटसोर्सिंग कंपनी में 70% स्थानीय प्रभावित ग्रामीणों को प्राथमिकता के साथ रोजगार दिया जाय बसाहट स्थल पर लंबित विकास कार्यों को तत्काल शुरू किया जाय
ग्राम पंचायत नराईबोध के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल सांकेतिक विरोध नहीं है यदि प्रबंधन और प्रशासन तत्काल ठोस निर्णय नहीं लेते हैं तो 15 अप्रैल 2026 से खदान के समीप ही विशाल पंडाल लगाकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा ।
पार्षद अमिला राकेश पटेल ने बताया कि प्रबंधन ने बार-बार केवल आश्वासन दिया है धरातल पर कोई काम नहीं हुआ जब तक हमारी मांगों पर सार्थक कार्रवाई नहीं होती यह आंदोलन जारी रहेगा किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी ।
ग्रामीणों में अपने साथ हो रहे अन्याय को लेकर आक्रोश तो है ही उनमें इस बात को लेकर के भी नाराजगी है कि जब भी वह विवस होकर आंदोलित होते हैं तो ना केवल खदान प्रबंधन उनकी उपेक्षा करता है बल्कि जिला प्रशासन भी उनकी ओर तनिक भी ध्यान नहीं देता जिसके कारण उनका क्रोध कई गुना बढ़ जाता है





