कोरबा के बाल संप्रेक्षण गृह में मिली शराब की बोतलें : दोषियों पर कार्रवाई करने से बच रहे अफसर, आखिर क्या है वजह..?
कोरबा। प्रदेश भर में बदनाम हो चुके कोरबा के बाल संप्रेक्षण गृह में अव्यवस्था खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। संस्था से बच्चों के लगातार भागने और अंदर का वीडियो वायरल होने के बाद इस बार बाल संप्रेक्षण गृह में शराब की बोतलें मिली हैं। इतना ही नहीं, संस्था में मौजूद बालकों के पास से अनेक आपत्तिजनक सामग्रियां भी बरामद हुई हैं। इस मामले की रिपोर्ट मिलने के बाद भी जिम्मेदार अफसरों ने अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं की है। कहा जा रहा है कि पहले से ही बदनाम इस संस्था की और भी बदनामी से बचने के लिए विभाग के जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है।
दरअसल कोरबा में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी (निवर्तमान) रेणु प्रकाश ने पिछले महीने ही जिला बाल संरक्षण इकाई के समस्त कर्मियों और अधिकारियों को बाल संप्रेक्षण गृह की रात के वक्त निगरानी की जिम्मेदारी का आदेश निकाला था। इसी के मुताबिक पिछले दिनों 3 कर्मी राजीव राज, अशोक राजवाड़े और गणेश जायसवाल कोहड़िया स्थित नए बाल संप्रेक्षण गृह गए हुए थे। इन तीनों ने अगले ही दिन एक रिपोर्ट सौंपी।
इन कर्मियों ने बाल संप्रेक्षण गृह की अधीक्षक दुर्गेश्वरी के अलावा जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश और जिला बाल संरक्षण अधिकारी दया दास को रिपोर्ट भेजी और बताया कि रात के वक्त तलाशी के दौरान संप्रेक्षण गृह में बालकों के पास बेल्ट, रस्सी, हाथ का कड़ा, नट–बोल्ट और कील पाया गया, वहीं रसोई कक्ष में शराब की 3 खाली बोतलें और गुटखा का रेपर भी मिला। बताया जाता है कि एक बोतल में कुछ शराब बची हुई थी। इसके बारे में तत्काल संस्था की अधीक्षिका और कर्मचारी को अवगत कराया गया।
इस मामले के बारे में अफसरों को रिपोर्ट किए जाने के 15 दिन गुजर जाने के बावजूद अब तक कोई भी कार्रवाई विभाग द्वारा नहीं की गई है। जबकि बताया जाता है कि शराब के बारे में पूछे जाने पर संस्था में मौजूद कर्मियों ने स्वीकार करते हुए बताया था कि शराब उन्होंने ही लाई है और सेवन किया है। इतना सब कुछ होने के बावजूद अफसरों ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। यह भी जांच का विषय है कि कर्मचारी कहीं होम्स में रह रहे बालकों को शराब तो मुहैया नहीं करा रहे थे।
बताते चलें कि इससे पूर्व भी संप्रेक्षण गृह से बालकों के अलग अलग समय में भागने के मामले भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं होम्स के बालकों का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के मामले में यहां की लापरवाह महिला कर्मचारी (हाउस फादर) को केवल यहां से हटाकर जिला बाल संरक्षण कार्यालय में संलग्न कर दिया गया है, मगर न तो उससे कोई कामकाज कराया जा रहा है और न ही अब तक कोई दंड दिया गया है। बताया जाता है कि इसी महिला कर्मी के मोबाइल से संबंधित वीडियो बनाया गया था।
जानकार बताते हैं कि कोरबा में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन संचालित बाल संप्रेक्षण गृह में व्याप्त अव्यवस्था और यहां से बालकों के बार बार फरार होने की घटनाओं के चलते वैसे भी बदनामी हो रही है। अब होम्स में शराब की बोतलें मिलने और बालकों के पास आपत्तिजनक सामग्रियां होने की बात अगर ऊपर या फिर मीडिया के पास पहुंची तो और भी बदनामी होगी। ऐसे में अफसर कोई कार्रवाई करने की बजाय इस मामले को दबाने में जुटे हुए हैं। बहरहाल देखना यह है कि कोरबा में विभाग की कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश के तबादले के बाद जिम्मेदारी संभाल रहे अफसर अब भी कोई कार्रवाई करेंगे या फिर इनका ढीला ढाला रवैया इसी तरह बरकरार रहता है।



