हेल्थ सेक्रेटरी के फरमान का पत्रकार कर रहे हैं विरोध
मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में सीधे रिपोर्टिंग की अनुमति नहीं
जनसंपर्क अधिकारी ही उपलब्ध कराएंगे जानकारी
अस्पतालों में मरीज के साथ कुछ भी हो जाए ,उनके परिजन कितना भी हाए तौबा मचा ले लेकिन जब तक अस्पताल प्रबंधन नहीं चाहेगा कोई भी पत्रकार उनसे बात नहीं कर सकेगा ।यदि किसी ने बिना अनुमति न्यूज़ कवरेज की चेष्टा की तो उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव द्वारा ऐसा निर्देश सभी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों को दिया गया है
कोरबा सहित प्रदेश के सभी जिलों के मीडिया कर्मी सतर्क हो जाएं क्योंकि छत्तीसगढ़ चिकित्सा विभाग के सचिव ने एक नया फरमान जारी किया है जिसके तहत अब कोई भी पत्रकार अस्पताल में प्रवेश कर किसी घटना दुर्घटना की जानकारी सीधे नहीं ले सकेगा। अस्पताल में कैसी भी अव्यवस्था हो उसे कैमरे में कैद कर वह खबर नहीं लगा सकता। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल से संबंधित किसी भी खबर के लिए नियुक्त किए जाने वाले जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क करना होगा।
इस आदेश का पूरे छत्तीसगढ़ में विरोध शुरू हो गया है। कांकेर प्रेस क्लब द्वारा आदेश की प्रति जलाकर विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा गया है की 3 दिन के भीतर इस तुगलकी फरमान को वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा
स्वास्थ्य सचिव द्वारा जारी आदेश की निंदा छत्तीसगढ़ के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव ने भी की है।

Vo इस आदेश की प्रति मेडिकल कॉलेज कोरबा प्रबंधन को भी मिल गई है ।अब कोई भी मीडिया कर्मी अस्पताल में सीधे प्रवेश कर खबर कव्हर नहीं कर पाएगा। इसे लेकर कोरबा के पत्रकारों में भी रोष व्याप्त है। कोरबा प्रेस क्लब को भी इस मामले में विरोध प्रकट करना चाहिए




