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‘मेरे लिए दुख की घड़ी, लेकिन रिकॉर्ड मतों से जीतूंगी’:सावित्री मंडावी बोलीं- शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधा का सपना पूरा करूंगी;बीजेपी प्रत्याशी ब्रम्हानंद से जनता नाराज

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acn18.com रायपुर/भानुप्रतापपुर उप चुनाव में तीन दिन बाद वोटिंग होनी है। आखिरी दौर का प्रचार चल रहा है। प्रत्याशी गांव-गांव जाकर लोगों से मिल रहे हैं। इस विधानसभा इलाके में कांग्रेस के दिवंगत नेता मनोज मंडावी का दबदबा हुआ करता था। निधन के बाद उनकी पत्नी कांग्रेस से प्रत्याशी बनाई गई हैं।

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जिन गांवों और गलियों में कभी उनके पति मनोज मंडावी की जय-जयकार लगा करती थी, आज वहां सावित्री मंडावी का नाम है। लोग सावित्री चाची कहकर उन्हें संबोधित करते हैं। सहानुभूति पूरी मिल रही है। कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि ये सहानुभूति वोटों में तब्दील होगी।

मोहन मरकाम भी सावित्री मंडावी के लिए प्रचार कर रहे हैं।
मोहन मरकाम भी सावित्री मंडावी के लिए प्रचार कर रहे हैं।

 

मेरे लिए दुख की घड़ी
मनोज मंडावी के निधन का दुख अब भी सावित्री मंडावी के चेहरे पर दिखता है। मगर सियासी जिम्मेदारी को निभाने में भी वो पीछे नहीं हट रहीं। उन्होंने बताया ये मेरे लिए दुख की घड़ी है। मगर जहां जा रही हूं लोगों का प्यार मिल रहा है। ये देखकर खुशी होती है। क्षेत्र की जनता चाहती थी कि ये चुनाव मैं लडूं, इस वजह से मैं सियासी मैदान में हूं। उनकी आशाओं को पूरा करना मेरी जवाबदारी रहेगी।

मैं उनके साथ आती थी
मनोज मंडावी अक्सर सावित्री मंडावी को लेकर भानुप्रतापपुर के गांवों में जाया करते थे। सावित्री ने बताया कि, मैं उनके साथ इन इलाकों में आया करती थी। शादियों में ग्रामीणों के पारिवारिक कार्यक्रमाें में तो सभी से परिचय है, लोग भी जानते हैं, मिलते हैं अच्छा लगता है। आज अकेले आना पड़ रहा है मगर लोगों का समर्थन मिलने से अच्छा लग रहा है।

CM भूपेश बघेल ने भी प्रचार का मोर्चा संभाला है।
CM भूपेश बघेल ने भी प्रचार का मोर्चा संभाला है।

 

मुझे कुछ कहना नहीं पड़ता
सावित्री मंडावी ने बताया- मैं प्रचार करने जहां जा रही हूं, मुझे कुछ कहना नहीं पड़ता। लोग खुद आकर कहते हैं कि मंडावी जी ने ये काम करवाए, तो क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को देखकर अच्छा लगता है। महिलाएं मिलने आती हैं। जनता खुद यहां हुए बेहतर कामों को गिनाती है।

शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं देना था उनका सपना
सावित्री मंडावी ने कहा कि मनोज मंडावी हमेशा से चाहते थे कि इस इलाके में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हो। मेरा भी यही प्रयास रहेगा कि इन दोनों सुविधाओं को बेहतर ढंग से इस इलाके में लाया जाए।

रिकॉर्ड मतों से जीतूंगी
सावित्री मंडावी ने कहा विपक्ष झूठे दावों के साथ चुनाव लड़ रहा है। इस इलाके में शासन ने बेहतर काम किया है। मेरे पति के जनता से किए वादों को पूरा करना मेरा लक्ष्य है। जनता का जो सपोर्ट मैं देख पा रही हूं मुझे विश्वास है कि हम रिकॉर्ड मतों से जीतेंगे।

भाजपा प्रत्याशी ब्रम्हानंद से जनता नाराज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भानुप्रतापपुर उप चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री मंडावी जीतेंगी। भाजपा के सामूहिक दुराचार के आरोपी प्रत्याशी ब्रम्हानंद नेताम के खिलाफ क्षेत्र में गहरा आक्रोश है। लोग भाजपा प्रत्याशी के कुकर्मों के कारण आहत है,और उसे हराने के लिये प्रतिबद्ध है। कांग्रेस ने स्व. मनोज मंडावी को श्रद्धांजलि स्वरूप सावित्री मंडावी को पार्टी का प्रत्याशी बनाया है। सावित्री मंडावी उच्च शिक्षित और संवेदनशील महिला हैं। स्व. मनोज मंडावी के जन कल्याणकारी कार्यों में अर्धांगिनी के रूप में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।

भानुप्रतापपुर की जनता अपने स्वर्गीय विधायक को श्रद्धांजलि स्वरूप सावित्री मंडावी के पक्ष में मतदान करेगी। भानुप्रतापपुर का एक-एक कांग्रेस कार्यकर्ता कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करवाने के लिये सक्रिय है। सरकार के 4 साल के काम संगठन की सक्रियता हमारे जीत का आधार बनेगी। 2018 के विधानसभा चुनाव में तीन चौथाई बहुमत से सरकार बनाने के बाद 4 सालों में जनता का भरोसा कांग्रेस के प्रति और बढ़ा है। चार उप चुनाव नगरीय निकाय चुनाव और पंचायत चुनावों में भरपूर आर्शीवाद देकर जनता ने कांग्रेस के प्रति अपने अटूट भरोसे को प्रदर्शित किया है।

टीचर रह चुकी हैं सावित्री

भानुप्रतापपुर विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष रहे मनोज मंडावी की पत्नी सावित्री मंडावी रायपुर के कटोरा तालाब स्थित सरकारी स्कूल में व्याख्याता के पद पर तैनात थीं। बच्चों को पढ़ाने का काम रहा है। जब निर्वाचन आयोग ने उप चुनाव का कार्यक्रम जारी किया। उसी दिन दोपहर बाद ही सावित्री मंडावी ने टीचर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। दिवंगत मनोज मंडावी की अंतिम यात्रा में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सावित्री मंडावी को उम्मीदवार बनाने की बात कही थी। कांकेर के चारामा में हुई मुख्यमंत्री की जनसभा में भी सावित्री मंडावी के समर्थन में नारे लगाए गए थे।

कौन हैं भाजपा के प्रत्याशी

भानुप्रतापपुर से ब्रह्मानंद नेताम को चुनाव लड़ाया जाएगा। नेताम को पार्टी ने फिर से टिकट दिया है। ब्रम्हानंद नेताम भानुप्रतापपुर से साल 2008 में विधायक रह चुके हैं। मनोज मंडावी को एक बार हरा चुके हैं। आदिवासी संगठनों में इनकी पैठ अच्छी मानी जाती है। इस बार भाजपा आदिवासी आरक्षण के मुद्दे के साथ चुनाव में है। नेताम की समाज में पैठ का फायदा भाजपा को मिल सकता है।

छत्तीसगढ़ में हुए उप चुनावों का इतिहास

राज्य स्थापना के बाद से प्रदेश में करीब 11 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव हुए हैं। इतिहास रहा है कि लोगों ने उप चुनावों में उसे ही विधायक बनाया जिसकी पार्टी की सरकार रही। जानकारों के मुताबिक इनमें से केवल एक सीट कोटा को छोड़कर बाकी सभी सीटों ऐसा ही हुआ। राज्य के पहले विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद के निधन की वजह से खाली हुई कोटा सीट पर जब उपचुनाव हुआ तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। इसके बावजूद वहां से कांग्रेस की ड. रेणु जोगी जीती थीं।

साल 2018 में दंतेवाड़ा की सीट से भाजपा के भीमा मंडावी ने चुनाव जीता। मंडावी नक्सल हमले में मारे गए सितंबर 2019 में उप चुनाव हुआ। यहां दिग्गज कांग्रेसी नेता महेंद्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा को जीत मिली। ये सीट अब कांग्रेस के पास है।

साल 2019 में चित्रकोट में उपचुनाव हुए। क्योंकि यहां से कांग्रेस के चुने विधायक दीपक बैज को लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना पड़ा वो जीत गए ये सीट खाली हुई तो कांग्रेस के ही राजमन बेंजाम ने उप चुनाव जीता और विधायक बने।

साल 2020 नवंबर में मरवाही में उप चुनाव हुए। यहां से विधायक रहे छत्तीसगढ़ के पहले सीएम अजीत जोगी की मौत के बाद जनता कांग्रेस से ये सीट कांग्रेस पास चली गई। कांग्रेस से केके ध्रुव को मौका मिला जीत गए। इसी साल 2022 में खैरागढ़ इस सीट से जकांछ के विधायक देवव्रत सिंह के निधन के बाद उप चुनाव हुआ कांग्रेस की यशोदा निलाम्बर वर्मा जीत गईं।

आदिवासी आंदोलन से कांग्रेस टेंशन में, BJP का यही कॉन्फीडेंस

प्रदेश में आदिवासी आरक्षण पर समाज आंदोलन कर रहा है। इस पूरे बवाल ने कांग्रेस की टेंशन बढ़ा दी है। कांग्रेस के बड़े नेता भी इसे तनाव में हैं, और हर हाल में इस सीट काे बचाने का दबाव भी है। दूसरी तरफ यही मुद्दा भाजपा के कॉन्फीडेंस की वजह बना हुआ है। भाजपा को आस है कि शायद इस मामले की वजह से वोटरों का रुझान भाजपा की ओर बढ़ जाए।

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