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गुरु की विदाई पर बिलख उठे विद्यार्थी ,वीडियो देखिए आपकी भी आंखें हो जाएगी नम

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सोशल मीडिया पर सामने आई एक तस्वीर इन दिनों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। तस्वीर में कोई बड़ा आयोजन नहीं, कोई मंच नहीं… बस एक शिक्षक और उन्हें विदा करते उनके मासूम शिष्य हैं। लेकिन इन तस्वीरों में दिखाई दे रही भावनाएं गुरु और शिष्य के रिश्ते की गहराई बयां कर रही हैं।

 

जिले के गौरेला ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक शाला केंवची में प्रधान पाठक के पद पर दो सालों से पदस्थ नागेंद्र सिंह ठाकुर की नवीन पदस्थापना पेंड्रा ब्लॉक के प्राथमिक शाला भर्रापारा में हुई है। जब नागेंद्र सिंह अपने पुराने विद्यालय से विदा होने लगे, तो माहौल भावुक हो गया।

 

जिस स्कूल में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, उसी स्कूल से जब उनके प्रिय शिक्षक विदा होने लगे तो छात्र-छात्राओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। कोई उन्हें निहारता रहा, तो कोई अपने आंसुओं को रोक नहीं पाया।

 

ऐसा लग रहा था, मानो कोई शिक्षक नहीं बल्कि परिवार का अपना सदस्य घर से दूर जा रहा हो।

 

प्रधान पाठक नागेंद्र सिंह ठाकुर ने इन बच्चों को सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं दिया, बल्कि उनके साथ एक ऐसा रिश्ता बनाया, जिसमें अनुशासन के साथ अपनापन और शिक्षा के साथ संस्कार भी शामिल रहे। यही वजह रही कि उनके स्थानांतरण की खबर बच्चों के लिए किसी अपने के बिछड़ने जैसी बन गई।

 

तस्वीरों में बच्चों की नम आंखें आज की शिक्षा व्यवस्था के बीच गुरु-शिष्य के उस रिश्ते की कहानी कह रही हैं, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

 

आज जब शिक्षक और विद्यार्थी के रिश्ते को अक्सर सिर्फ स्कूल और पढ़ाई तक सीमित समझा जाता है, ऐसे में केवची प्राथमिक शाला की ये तस्वीरें याद दिलाती हैं कि एक सच्चा शिक्षक बच्चों के जीवन में सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और परिवार के सदस्य की तरह जगह बना सकता है।

 

शायद यही गुरु की सबसे बड़ी कमाई है—जब विदाई के वक्त शिष्य की आंखों में आंसू हों और दिल में गुरु के लिए सम्मान।

 

नागेंद्र सिंह ठाकुर की विदाई ने केवची स्कूल में गुरु-शिष्य परंपरा की एक ऐसी भावुक तस्वीर छोड़ दी, जो लंबे समय तक बच्चों और स्कूल से जुड़े लोगों की यादों में बनी रहेगी……