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सेवा की कहानी : सेवा संकल्प अभियान: डबरी बनी समृद्धि का आधार, सिंचाई के साथ मछली पालन से बढ़ी आय

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जल संरक्षण से आजीविका संवर्धन की ओर बढ़ता ग्राम बेन्द्राचुवा

धमतरी,30 सितंबर 2026

जल की हर बूंद को सहेजकर उसे आजीविका का आधार बनाने की सोच ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। इसका जीवंत उदाहरण मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंचायत पठार के आश्रित ग्राम बेन्द्राचुवा में देखने को मिल रहा है। यहां वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरी ने किसान श्री प्रभु लाल पिता श्री तीजू राम के लिए खेती के साथ अतिरिक्त आय का रास्ता खोला है। कभी वर्षा पर निर्भर रहने वाली कृषि भूमि अब सिंचाई सुविधा से जुड़ने के साथ मछली पालन का भी माध्यम बन गई है।

सेवा  की कहानी में श्री प्रभु लाल के खेत में वर्ष 2025-26 में वीबी-जी रामजी योजना के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण की स्वीकृति दी गई। डबरी निर्माण के लिए 2.55 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई, जिसमें से 2.24 लाख रुपये का व्यय किया गया। निर्मित डबरी में वर्षा जल का संचयन होने से खेत के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई और इसका सीधा लाभ किसान की कृषि गतिविधियों को मिला।

2.5 एकड़ खेत को मिली सिंचाई की सुविधा

डबरी निर्माण से श्री प्रभु लाल के लगभग 2.5 एकड़ कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई है। वर्षा जल के संचयन से अब फसल की आवश्यकता के अनुसार पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे खेती की अनिश्चितता कम हुई है और फसल को महत्वपूर्ण अवस्थाओं में आवश्यक सिंचाई मिल पा रही है।

पहले कृषि कार्य मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर था। बारिश की स्थिति अनुकूल नहीं होने पर फसल को पानी की कमी का सामना करना पड़ता था। डबरी बनने के बाद खेत में उपलब्ध जल का आवश्यकता के अनुसार उपयोग संभव हुआ है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है तथा कृषि से बेहतर आय की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

सिंचाई के साथ शुरू किया मछली पालन

श्री प्रभु लाल ने डबरी को केवल सिंचाई के स्रोत के रूप में सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अतिरिक्त आजीविका के साधन के रूप में विकसित करने की पहल की। उन्होंने डबरी में लगभग 5 किलोग्राम मछली बीज डाला और मछली पालन शुरू किया।

मछली पालन से उन्हें बीते एक वर्ष में लगभग 5 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। यह राशि भले ही छोटी दिखाई दे, लेकिन ग्रामीण परिवार के लिए यह अतिरिक्त आमदनी कृषि गतिविधियों को सहारा देने के साथ घरेलू जरूरतों की पूर्ति में उपयोगी साबित हुई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक ही परिसंपत्ति से उन्हें सिंचाई और मछली पालन—दोहरा लाभ प्राप्त हो रहा है।

जल संरक्षण से आय के नए अवसर

श्री प्रभु लाल के खेत की यह डबरी इस बात का उदाहरण है कि जल संरक्षण से जुड़े कार्य केवल पानी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप आजीविका के विविध साधनों से जोड़ा जा सकता है। वर्षा जल का संचयन, खेत की सिंचाई और डबरी में मछली पालन—इन तीनों गतिविधियों के समन्वय ने उपलब्ध संसाधन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया है।

ऐसी परिसंपत्तियां ग्रामीण परिवारों को मौसम आधारित कृषि की चुनौतियों से निपटने में सहयोग देती हैं। साथ ही खेती के साथ संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देकर आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने का अवसर भी प्रदान करती हैं। इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम बढ़ते हैं।

मेहनत और योजना से बदली तस्वीर

श्री प्रभु लाल के लिए डबरी महज खेत में बना जलस्रोत नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और संसाधनों के बेहतर उपयोग का माध्यम बन चुकी है। जल संरक्षण से मिली सिंचाई सुविधा ने खेती को संबल दिया, वहीं मछली पालन ने अतिरिक्त आमदनी का अवसर प्रदान किया। योजना से निर्मित परिसंपत्ति का स्थानीय जरूरत के अनुसार उपयोग कर उन्होंने यह साबित किया है कि सही संसाधन, मेहनत और बेहतर प्रबंधन से ग्रामीण आजीविका को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।

बेन्द्राचुवा की यह पहल जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन के बीच मजबूत संबंध को रेखांकित करती है। वीबी-जी रामजी योजना के माध्यम से निर्मित आजीविका डबरी अब श्री प्रभु लाल के परिवार के लिए जल सुरक्षा, कृषि विकास और अतिरिक्त आय—तीनों का आधार बन रही है। यह कहानी ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण कार्यों को आजीविका से जोड़ने की संभावनाओं और सामुदायिक स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत करती है।

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