
कभी जिस फुटका पहाड़ से बॉक्साइट निकालकर बालको में एल्युमिनियम का निर्माण किया जाता था और देश-विदेश तक उसकी चमक पहुंचती थी, आज वही ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल प्रभु श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान जहां आदिवासियों के बीच बैठकर उनके दुख-दर्द को साझा किया था, उसी पावन स्थली “राम कचहरी” में नगर निगम द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस आयोजन ने इस ऐतिहासिक धरोहर को एक बार फिर से सुर्खियों और जनमानस के केंद्र में ला दिया है।
कार्यक्रम के दौरान फुटका पहाड़ की प्राकृतिक वादियां रामधुन और भजनों से सराबोर नजर आईं। आमंत्रित गायक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक सुरीले भजन प्रस्तुत किए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में शामिल हुईं महापौर संजू देवी राजपूत स्वच्छता दीदियों के साथ जमकर थिरकती और नृत्य करती नजर आईं, जिसने वहां मौजूद लोगों का मन मोह लिया। राम और लक्ष्मण के रूप में सजे कलाकारों के साथ स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने जमकर तस्वीरें खिंचवाईं। आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोग इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल की सुंदरता को निहारते नहीं थक रहे थे। राम कचहरी में पीढ़ियों से भगवान की सेवा और पूजा-अर्चना कर रहे स्थानीय वनवासी भाइयों की इस स्थल के प्रति अगाध श्रद्धा है। उनका कहना है कि उनकी न जाने कितनी पीढ़ियां यहां भजन-पूजन करते-करते बीत गई हैं।वनवासियों का यह भी अनुभव है कि इस पवित्र स्थल पर उन्हें किसी भी प्रकार का भय नहीं सताता। उनका विश्वास है कि यहां आने-जाने वालों पर जंगल के हिंसक जानवर भी कभी प्रहार नहीं करते, बल्कि उनके रास्ते से खुद-ब-खुद हट जाते हैं।
एक ओर जहां राम कचहरी के प्रति आदिवासियों और श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा है, वहीं दूसरी ओर उनके मन में एक टीस भी है। स्थानीय आदिवासियों और संरक्षकों का दर्द यह है कि अगाध धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व होने के बावजूद, उन्हें शासन-प्रशासन से वे मूलभूत सुविधाएं और विकास का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिसके वे हकदार हैं। सड़क, पानी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण इस स्थल तक पहुंचना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।





