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छत्तीसगढ़ में उद्योगों को नई रफ्तार, रोजगार के लिए सरकार का बड़ा फोकस, निवेश से लेकर स्टार्टअप और स्वरोजगार तक,युवाओं के लिए खुल रहे नए अवसर

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छत्तीसगढ़… खनिज संपदा, कृषि, वन उत्पाद और औद्योगिक संभावनाओं से भरपूर राज्य। अब राज्य में उद्योगों के विस्तार के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के जरिए बड़े निवेश से लेकर छोटे उद्योग, स्टार्टअप, तकनीकी उद्यम और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन देने की कोशिश की जा रही है।

 

औद्योगिक विकास नीति 2024-30 एक नवंबर 2024 से लागू है और 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। इस नीति का उद्देश्य राज्य में औद्योगिक विकास को गति देना और निवेश के साथ रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

 

 

सरकार की उद्योग नीति में निवेशकों के लिए कई तरह की प्रोत्साहन सुविधाएं रखी गई हैं। इनमें पूंजी निवेश सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी में छूट, तकनीकी पेटेंट और टेक्नोलॉजी खरीद जैसी सहायता शामिल है।

 

राज्य के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के मुताबिक औद्योगिक नीति के तहत पात्र इकाइयों के लिए पूंजी निवेश सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, तकनीकी पेटेंट सब्सिडी और टेक्नोलॉजी खरीद पर सब्सिडी जैसे प्रावधान हैं। रोजगार से जुड़े निवेशों के लिए रोजगार सहायता और ईपीएफ प्रतिपूर्ति की व्यवस्था भी नीति में शामिल है।

 

 

यानी सरकार का फोकस सिर्फ कारखाने लगाने तक सीमित नहीं है… बल्कि ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देने पर है, जहां स्थानीय स्तर पर ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।

 

विशेष रूप से बड़े निवेश या बड़ी संख्या में रोजगार देने वाली इकाइयों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। कुछ क्षेत्रों में 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश या एक हजार से ज्यादा रोजगार सृजित करने वाली परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन का उल्लेख किया गया है।

 

रोजगार पर फोकस

औद्योगिक नीति में रोजगार को सीधे निवेश प्रोत्साहन से जोड़ने की कोशिश की गई है। पात्र इकाइयों को रोजगार सहायता और कर्मचारियों के ईपीएफ योगदान की प्रतिपूर्ति जैसे प्रावधान दिए गए हैं।

 

इसका मकसद यह है कि राज्य में उद्योग आएं, उत्पादन बढ़े और उसके साथ स्थानीय युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर भी तैयार हों।

 

स्टार्टअप और युवा उद्यमी

अब बात उन युवाओं की… जो नौकरी तलाशने के बजाय खुद रोजगार देने वाला उद्यम खड़ा करना चाहते हैं।

 

छत्तीसगढ़ में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक विकास नीति के साथ स्टार्टअप से जुड़े प्रोत्साहन प्रावधान भी लागू हैं। राज्य के निवेश पोर्टल पर 2026 के छत्तीसगढ़ स्टार्टअप प्रोत्साहन नियम उपलब्ध हैं।

 

मान्यता प्राप्त स्टार्टअप के लिए पेटेंट, तकनीक खरीद, रोजगार और प्रशिक्षण से जुड़ी सहायता के प्रावधान किए गए हैं।

 

पेटेंट और तकनीक

नई तकनीक पर काम करने वाले स्टार्टअप के लिए पेटेंट खर्च में सहायता का भी प्रावधान है। सरकारी जानकारी के मुताबिक पात्र स्टार्टअप को राष्ट्रीय पेटेंट के खर्च का 75 प्रतिशत तक, अधिकतम 10 लाख रुपये और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये तक सहायता मिल सकती है।

 

वहीं सरकारी शोध संस्थानों से तकनीक खरीदने पर पात्र स्टार्टअप को 50 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये बताई गई है।

 

स्टार्टअप से रोजगार

स्टार्टअप के जरिए रोजगार पैदा करने पर भी विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

 

सरकारी पोर्टल के अनुसार, 10 से ज्यादा ऑन-रोल कर्मचारी रखने वाले पात्र स्टार्टअप को छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए महिला कर्मचारी पर हर महीने 6 हजार रुपये और पुरुष कर्मचारी पर 5 हजार रुपये तक की सहायता पांच साल तक मिल सकती है, निर्धारित शर्तों के अधीन।

 

यानी नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऐसा भी है, जिसमें नए कारोबार को बढ़ावा देने के साथ-साथ नए रोजगार पैदा करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

 

प्रशिक्षण और कौशल

रोजगार सिर्फ उद्योग लगाने से नहीं मिलता… इसके लिए कुशल मानव संसाधन भी जरूरी है।

 

इसी वजह से उद्योगों और रोजगार से जुड़ी योजनाओं में प्रशिक्षण को भी महत्व दिया गया है। पात्र औद्योगिक इकाइयों और स्टार्टअप के लिए प्रशिक्षण खर्च तथा प्रशिक्षण स्टाइपेंड से संबंधित सहायता के प्रावधान मौजूद हैं।

 

स्वरोजगार और छोटे उद्यम

बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे उद्यम और स्वरोजगार भी रोजगार का बड़ा माध्यम हैं।

 

छत्तीसगढ़ के निवेश पोर्टल पर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी PMEGP जैसी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए स्वरोजगार उद्यम और माइक्रो एंटरप्राइज स्थापित कर रोजगार के अवसर पैदा करना है।

 

इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे उद्यमों के लिए PMFME और पारंपरिक कारीगरों के लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा जैसी योजनाएं भी उपलब्ध हैं।

 

स्थानीय स्तर पर रोजगार

इन योजनाओं का एक बड़ा उद्देश्य यह भी है कि युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलें।

 

खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यवसाय, छोटे उद्योग, सेवा क्षेत्र और तकनीकी उद्यम जैसे क्षेत्रों में छोटे स्तर से शुरुआत कर व्यवसाय को आगे बढ़ाने के रास्ते बनाए जा सकते हैं।

 

महिलाओं के लिए अवसर

महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में नीतिगत प्रयास किए गए हैं।

 

छत्तीसगढ़ सरकार के निवेश पोर्टल पर महिला उद्यमिता नीति-2023 भी उपलब्ध है। इसके जरिए महिला उद्यमियों को उद्योग और व्यवसाय से जोड़ने के लिए विशेष नीति व्यवस्था की गई है।

 

रोजगार पंजीयन

वहीं नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए राज्य का ई-रोजगार पोर्टल भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

 

रोजगार इच्छुक युवा ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं और अपना रोजगार पंजीयन पहचान पत्र ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। सरकारी पोर्टल के अनुसार पहले से पंजीकृत आवेदकों को नया पंजीयन करने के बजाय अपने पुराने पंजीयन से अपडेट या नवीनीकरण की सुविधा दी गई है।

 

उद्योग से जुड़ी व्यापक रणनीति

छत्तीसगढ़ में उद्योग और रोजगार की पूरी व्यवस्था को केवल बड़े कारखानों तक सीमित नहीं रखा गया है।

 

औद्योगिक नीति में अलग-अलग क्षेत्रों और समूहों के लिए विशेष प्रोत्साहन, स्टार्टअप, छोटे और कुटीर उद्योग तथा लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को भी नीति ढांचे में शामिल किया गया है।

 

यानी एक तरफ बड़े निवेश को आकर्षित करने की कोशिश है… तो दूसरी तरफ छोटे उद्यमियों, स्टार्टअप और स्वरोजगार करने वाले युवाओं के लिए भी रास्ते तैयार किए जा रहे हैं।

 

उद्योगों के लिए सुविधाएं

निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल को आसान बनाने के उद्देश्य से राज्य ने निवेश प्रोत्साहन के लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी विकसित की है।

 

सरकारी निवेश पोर्टल पर नीतियां, प्रोत्साहन योजनाएं, सब्सिडी से जुड़ी जानकारी और निवेश प्रक्रिया से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

भविष्य की चुनौती

हालांकि योजनाओं का लाभ जमीन पर कितना पहुंचता है… कितने नए उद्योग स्थापित होते हैं… कितने युवाओं को वास्तविक रोजगार मिलता है… और छोटे उद्यम कितने टिकाऊ बन पाते हैं… ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब इन योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन और आंकड़ों से मिलेगा।

 

किसी भी रोजगार नीति की सफलता केवल घोषणा से नहीं, बल्कि निवेश, प्रशिक्षण, उद्योग स्थापना, स्थानीय भर्ती और लंबे समय तक रोजगार बनाए रखने के परिणामों से तय होती है।

कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में उद्योग और रोजगार को लेकर सरकार की रणनीति कई स्तरों पर दिखाई देती है।

 

बड़े निवेश के लिए औद्योगिक विकास नीति…

स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहन…

छोटे उद्योगों और स्वरोजगार के लिए योजनाएं…

कौशल और प्रशिक्षण पर जोर…

महिला उद्यमिता को बढ़ावा…

और रोजगार चाहने वाले युवाओं के लिए ऑनलाइन रोजगार पंजीयन की व्यवस्था।

 

अब चुनौती इन योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा युवाओं और उद्यमियों तक पहुंचाने की है, ताकि छत्तीसगढ़ में निवेश बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी मजबूत हो सकें।

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